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चौपाल: भ्रष्टाचार पर लगाम व बदलती सोच

यह किसी से छिपा नहीं कि नेताओं अथवा रसूख वालों के मामलों में तारीख पर तारीख का सिलसिला कायम हो जाता है।

Author Published on: September 20, 2019 3:03 AM
सांकेतिक तस्वीर।

आम तौर पर राजनीतिक घपले-घोटाले का कोई मामला सामने आने पर कठघरे में खड़े नेता पहले तो सरकार को चुनौती देते हुए यह कहते हैं कि अगर उसके पास सबूत हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं करती? जब कभी कार्रवाई आगे बढ़ती है तो यह शोर मचाया जाने लगता है कि सरकारी एजेंसियों का मनमाना इस्तेमाल किया जा रहा है। कई बार तो यह भी कह दिया जाता है कि जांच एजेंसियों के साथ-साथ अदालतें भी सरकार से प्रभावित होकर काम कर रही हैं।
ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक जांच एजेंसियों का कामकाज विश्वसनीयता नहीं हासिल कर लेता।

निस्संदेह जांच एजेंसियों के साथ-साथ अदालतों से भी यह अपेक्षित है कि वे सक्रियता का परिचय दें। यह किसी से छिपा नहीं कि नेताओं अथवा रसूख वालों के मामलों में तारीख पर तारीख का सिलसिला कायम हो जाता है। राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और भ्रष्ट तत्त्वों को सबक सिखाने के लिए यह नितांत अनिवार्य है कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों का निपटारा कहीं अधिक तेजी से हो।

’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर

बदलती सोच

इन दिनों ऑटोमोबाइल उद्योग में आई मंदी की खूब चर्चा है। हर कोई कह रहा है कि मांग कम होने से कारों की बिक्री में गिरावट आई है। इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है। लेकिन समझने वाली बात है कि लोगों की कार खरीदने में दिलचस्पी कम होने का कारण पैसे की कमी नहीं है। लोग आज भी बाहर खाने-पीने में खूब पैसा खर्च कर रहे हैं, महंगे मोबाइल फोन खरीद रहे हैं। बिग बाजार जैसे स्टोर्स में बिल भुगतान के लिए लाइनें लगी रहती हैं। असल में कार न खरीदने के पीछे लोगों की बदलती सोच भी है। खुद कार चलाने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। जाम में जूझना पड़ता है। हर जगह पार्किंग की समस्या रहती है।

गाड़ी के सारे पेपर तैयार रखने पड़ते हैं फिर भी चालान कटने का डर लगा रहता है। इसके विपरीत आजकल ओला-उबर जैसी सुविधाजनक और किफायती सेवा उपलब्ध है जिसमें महज कुछ ही मिनटों में कार ड्राइवर के साथ उपलब्ध हो जाती है और हम तनाव से मुक्त होकर जहां जाना चाहें जा सकते हैं। साथ ही ओला बाइक्स भी उपलब्ध हैं जो बहुत कम खर्च में मंजिल तक पहुंचा देती हैं। इसलिए कार खरीदने में लोगों की रुचि घटती जा रही है।
’बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद

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