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चौपाल: अपराध और दंड

अगर यही सब होता रहा तो समाज में महिलाओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं रहेगा। देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। उनकी सुरक्षा के लिए अनेक नियम-कानून बनाए गए हैं मगर उनका सही ढंग से पालन नहीं हो रहा।

Author May 16, 2019 1:44 AM
दुष्कर्म और हत्या जैसी वारदातें रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं।

राजस्थान के अलवर में हुए सामूहिक बलात्कार से दिल दहल उठा है। यह शर्मनाक वारदात राजनीति करने या चुनावी लाभ लेने का विषय नहीं बल्कि ऐसा माहौल बनाने का है कि भविष्य में सभ्य समाज को विचलित करने वाली ऐसी जघन्य घटनाओं पर लगाम लग सके। इससे ज्यादा दुखद और क्या हो सकता है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने ही इस मामले को दबाने की कोशिश की ताकि उसका चुनाव पर कोई असर नहीं पड़े।

एफआइआर दर्ज कराने में भी बहुत विलंब किया। काफी मशक्कत करने के बाद किसी तरह एफआइआर दर्ज हुई तो अपराधियों को पकड़ने में मुस्तैदी और सख्ती नहीं बरती गई। महज इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि लापरवाही और संवेदनहीनता का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई क्योंकि यही अधिक जान पड़ता है कि जन आक्रोश को शांत करने के इरादे से यह कार्रवाई की गई।

इस मामले में तो ऐसी कार्रवाई की जरूरत थी जिससे कोई मिसाल कायम होती ताकि दुबारा ऐसी घटनाएं न हों। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। यह पुलिस के टालमटोल वाले रवैये का ही दुष्परिणाम रहा कि एक दलित महिला का उसके पति के सामने दुष्कर्म करने वालों ने अपने दुष्कृत्य का वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाल दिया। पुलिस चाहती तो ऐसी होने से रोक सकती थी लेकिन वह चुनावों की चिंता कर रही थी। उसके नाकारापन की हद यह भी है कि वारदात के करीब एक सप्ताह बाद केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी।

अगर यही सब होता रहा तो समाज में महिलाओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं रहेगा। देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। उनकी सुरक्षा के लिए अनेक नियम-कानून बनाए गए हैं मगर उनका सही ढंग से पालन नहीं हो रहा। घर हो या बाहर, अक्सर महिलाएं उत्पीड़न का शिकार हो जाती हैं। उनके साथ घरेलू हिंसा तो आम बात है, दुष्कर्म और हत्या जैसी वारदातें रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं।
’दीपिका शर्मा, सूरजकुंड, गोरखपुर

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