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चौपाल: दुरुस्त आयद व पटाखों से परहेज

अमेरिका जैसे देश इस मामले में अत्यंत जागरूक हैं और वहां सोशल नेटवर्किंग साइट पर नियंत्रण को लेकर पर्याप्त कदम समय-समय पर उठाए जाते हैं।

Author Published on: October 18, 2019 2:03 AM
सोशल मीडिया के दुरुपयोग को देखते हुए उसके बारे में युवाओं को जागरूक करने के लिए इस तरह के पाठ्यक्रम की आवश्यकता बड़ी शिद्दत से महसूस की जा रही थी।

बीते दिनों विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देर से ही सही मगर दुरुस्त कदम उठाते हुए युवाओं को सोशल मीडिया की नैतिकता और शिष्टाचार सिखाने के लिए इसे स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को देखते हुए उसके बारे में युवाओं को जागरूक करने के लिए इस तरह के पाठ्यक्रम की आवश्यकता बड़ी शिद्दत से महसूस की जा रही थी। आजकल सोशल मीडिया आपस में लोगों के जुड़ने और संचार का प्रमुख साधन बन गया है। हमारे जीवन में उसकी निरंतर बढ़ती उपयोगिता के साथ-साथ उसका निहित स्वार्थी तत्त्वों द्वारा दुरुपयोग भी बढ़ता जा रहा है।

आज सोशल मीडिया को कुछ लोगों ने दुष्प्रचार का माध्यम भी बना लिया है जिसके कारण झूठी और नफरत फैलाने वाली खबरों की एक अलग ही दुनिया बन गई है जो समाज को बांटने और आपसी विश्वास में दरारें डालने का काम कर रही है। बड़े पैमाने पर अफवाहों, खौफ और नकारात्मक खबरों को प्रसारित-प्रचारित करने में सोशल मीडिया की भूमिका के मद्देनजर कई बार इसे नियमित और नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग भी उठती रही है।

सोशल मीडिया में झूठी खबरों की समस्या की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश परंपरागत माध्यम, जैसे रेडियो, टीवी और पत्र-पत्रिकाएं ‘फेक न्यूज’ यानी झूठी या फर्जी खबरों को जानने की व्यवस्था करने लगे हैं।

अमेरिका जैसे देश इस मामले में अत्यंत जागरूक हैं और वहां सोशल नेटवर्किंग साइट पर नियंत्रण को लेकर पर्याप्त कदम समय-समय पर उठाए जाते हैं। भारत में भी सोशल मीडिया से संबंधित नैतिक और शिष्टाचार से जुड़े पाठ्यक्रम युवाओं की भावनात्मक और बौद्धिक क्षमताओं को विकसित करने और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महती भूमिका निभाएंगे तभी सही मायने में सोशल मीडिया अपने नाम को सार्थक करेगा।

’बिजेंद्र कुमार, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

पटाखों से परहेज

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपील की है कि दिवाली पर फटाखे नहीं फोड़ें। प्रदूषण के कारण सभी को परेशान होना पड़ता है। हम सब बुराइयों का ठीकरा सरकार पर फोड़ते हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारियां नहीं समझते हैं। पूरे देश की जनता से उम्मीद है कि फिजा में शोर व धुआं फैलाने से तौबा करें। चाहे दिवाली हो, शादी-ब्याह हो या खुशी का कोई अन्य अवसर हो, सभी लोग पटाखे नहीं फोड़ने का संकल्प लें। अगर हमें पर्व मनाना है तो ऐसे पटाखे इस्तेमाल करें जो पर्यावरण के अनुकूल हों। सरकार को ऐसे पटाखों के बारे में जनता को जागरूक करना चाहिए। हम सभी संकल्प लें कि ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जो वातावरण को विषैला बनाए।

’हेमा हरि उपाध्याय अक्षत, खाचरोद, उज्जैन

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