ताज़ा खबर
 

चौपाल: साझा मकसद, हादसों के मद्देनजर व किस पर विश्वास

किसान हितैषी और जन कल्याणकारी योजनाओं में राज्य सरकारों को राजनीति करने से बाज आना चाहिए।

सांकेतिक तस्वीर।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और किसान पेंशन योजना के प्रति कुछ प्रदेश सरकारों का रुख उदासीन बना हुआ है। पश्चिम बंगाल सरकार ने तो इन योजनाओं के तहत एक भी किसान का डाटा केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ की सरकारों का रवैया भी उत्साहवर्धक नहीं है। गौरतलब कि इन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं। केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता के चलते उसने देश के सभी किसानों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से इस समस्या का हल खोज लिया है।

अब किसान अपनी अकेले की जानकारी व्यक्तिगत रूप से सीधे भारत सरकार के कृषि मंत्रालय को भेज सकते हैं। मंत्रालय इसे दर्ज करके योजना का लाभ सभी किसानों को दे सकता है। किसान हितैषी और जन कल्याणकारी योजनाओं में राज्य सरकारों को राजनीति करने से बाज आना चाहिए। आम जनता को राहत पहुंचाना सभी सरकारों का साझा उद्देश्य होना चाहिए।

’ललित महालकरी, इंदौर

हादसों के मद्देनजर

इसमें संदेह नहीं कि सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही होती है, लेकिन सड़कों के डिजाइन में खामी, उनके गड्ढे, किनारों पर अतिक्रमण, आवारा पशु और रोशनी की कमी आदि के कारण भी हादसे होते हैं। स्पष्ट है कि सड़कों के बेहतर रखरखाव के साथ ही यातायात व्यवस्था भी दुरुस्त की जानी चाहिए। क्या यह उचित नहीं होगा कि सड़कों के रखरखाव में लापरवाही बरतने वालों को भी भारी जुर्माने का भागीदार बनाया जाए? कम से कम यातायात पुलिस के संख्याबल के अभाव को तो प्राथमिकता के आधार पर दूर किया ही जाना चाहिए।

चूंकि भारी जुर्माने के प्रावधान अमल में आने के बाद अवैध वसूली का भी अंदेशा है, इसलिए ऐसी कोई व्यवस्था की जानी चाहिए कि यातायात पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से लैस हो। यह भी आवश्यक है कि सरकारी वाहन किसी तरह की रियायत न पाने पाएं और भारी वाहनों पर खास निगाह रखी जाए। सड़क दुर्घटनाएं रोकने के मकसद को पूरा करने में संकीर्ण राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता, लेकिन यह एक विडंबना ही है कि कुछ राज्य सरकारें असहयोग का प्रदर्शन करती हुई दिख रही हैं।

’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर

किस पर विश्वास

राजस्थान में घटित हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के तहत बसपा के सभी छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की खबर से उन मतदाताओं को काफी निराशा हुई होगी जिन्होंने भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाते हुए बसपा के प्रति अपना विश्वास जताया होगा। निस्संदेह इस प्रकार की हरकतें जनमत के साथ धोखा और लोकतांत्रिक मूल्यों को धता बताने वाली हैं। पूरी तरह स्पष्ट है कि सत्ता में बने रहने के लिए नेताओं की न तो कोई विचारधारा होती है और न ही जनमत के प्रति कोई प्रतिबद्धता। ऐसे में भला जनता किस पर विश्वास जताए?

विडंबना है कि देश के अन्य प्रदेशों में भी इस तरह की राजनीतिक पैंतरेबाजी सामने आती रही है। देश के बड़े राजनीतिक दलों को राजनीतिक शुचिता बरकरार रखने के लिए ऐसे व्यवहार से बचना चाहिए। लोकतंत्र में जनमत के साथ धोखाधड़ी का यह चलन शीध्र ही बंद होना चाहिए।
’मंजर आलम, रामपुर डेहरू, मधेपुरा

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: दावे और हकीकत व एनआरसी से परहेज
2 चौपाल: भ्रष्टाचार पर लगाम व बदलती सोच
3 चौपाल: संवेदना के विरुद्ध, बयान का निहितार्थ व दुरुस्त आयद
ये पढ़ा क्या?
X