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चौपाल: सामूहिक जिम्मेदारी

ऑस्ट्रिया के शानदार शहर वियना ने जीवन अनुकूलता सूचकांक में अपने सर्वोच्च स्थान को कायम रखा है।

Author Published on: September 17, 2019 1:55 AM
सांकेतिक तस्वीर।

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने जो ताजा जीवन अनुकूलता सूचकांक रिपोर्ट जारी की है उसमें न केवल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली बल्कि देश की व्यावसायिक राजधानी कहलाने वाली मुंबई भी नीचे फिसल गई है। दिल्ली रहने के लिए दुनिया के शहरों में 112 से 118 में स्थान पर आ गई है। भारत एक विकासशील देश है। हमें ऐसे शहर चाहिए जो दुनिया को भारत आने के लिए मजबूर करें। जब हम शहरों को रहने लायक बनाएंगे तो ज्यादा निवेश और खुशी को सहजता से आमंत्रित कर सकेंगे।

हमारे शहर लगातार विस्थापन और पुनर्वास से गुजर रहे हैं। यहां स्थिरता न के बराबर है। न हमें इनकी संस्कृति की चिंता है और न परिवेश की। लोग यहां खुद को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं यह भी बताने की जरूरत नहीं है। हमारी बड़ी आबादी ऐसी है जो मूलभूत चिकित्सा सेवाओं से भी वंचित है। सड़क, बिजली, पानी के मोर्चे पर भी समस्याएं जितनी सुलझाई जाती हैं उससे ज्यादा उलझी नजर आती हैं। बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं जो उचित शिक्षा से वंचित हैं। निस्संदेह, हमें वियना, सिडनी, ओसाका, टोरंटो, टोक्यो से सीखना चाहिए।

ऑस्ट्रिया के शानदार शहर वियना ने जीवन अनुकूलता सूचकांक में अपने सर्वोच्च स्थान को कायम रखा है। इन शहरों ने रहवास के ऊंचे मुकामों को कैसे हासिल किया है, हमें इनकी कामयाबी का अध्ययन करना चाहिए।

यह एक ऐसा मोर्चा है जहां जिम्मेदारी सामूहिक है। शहरों को रहने लायक बनाने के लिए जहां शासन-प्रशासन के स्तर पर एकजुट होकर समेकित विकास के लिए काम करना होगा वहीं नागरिकों को भी देखना होगा कि शहर को रहने लायक बनाने में उनका कैसा और कितना योगदान हो सकता है। यह भी तय करना होगा कि यहां से हमें और नीचे गिरना है या फिर ऐसे ठोस कदम उठाने हैं जिनसे अगले वर्ष की रैंकिंग में हमारी स्थिति बेहतर हो जाए।

’सौरभ शर्मा, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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