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चौपाल: रोजगार की फिक्र

विशेषज्ञों का मानना है इसका प्रमुख कारण बेरोजगारी है, क्योंकि बेरोजगारी के कारण लोगों के पास पैसे ही नहीं है तो वह खर्च कहां करे? इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार को इसके लिए त्वरित हल निकालना चाहिए।

Author Updated: December 9, 2019 4:21 AM
शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर में आयी गिरावट। (एक्सप्रेस इलेस्ट्रेशन)

गत नवंबर माह में प्रधानमंत्री ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया गए थे। मौका था ब्रिक्स सम्मेलन। इस बैठक की थीम ‘नवोन्मेषी भविष्य के लिए आर्थिक वृद्धि’ रखा गया था, क्योंकि विश्व के दो बड़े उपभोक्ता देश भारत और चीन की अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा हैै। भारत की चिंता घरेलू मंदी है तो वहीं चीन अमेरिका के संरक्षणवादी नीति से परेशान है। भारत ने हाल ही में आरसीईपी में शामिल होने से मना कर दिया और कारण दिया कि शर्तों के अनुकूल न होने और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत ने आरसीईपी में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। भारत के सभी कोर सेक्टर में मंदी चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है इसका प्रमुख कारण बेरोजगारी है, क्योंकि बेरोजगारी के कारण लोगों के पास पैसे ही नहीं है तो वह खर्च कहां करे? इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार को इसके लिए त्वरित हल निकालना चाहिए।
’संदीप कुमार ईसीसी, प्रयागराज

स्त्री का भय

इतनी जल्दी तो शायद सरकार द्वारा चलाई गई युक्तिबद्ध नीतियां भी कार्यान्वित होनी आरंभ नहीं होती, जितनी जल्दी-जल्दी देश के लगभग हर कोने से बलात्कार और पीड़िता को मार डालने या जला देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हैदराबाद में हुए निर्मम बलात्कार और हत्याकांड से शायद दूसरे अपराधी मर्दों ने सीख ली कि पहले स्त्री को मिल कर नोचो, फिर उसको जला दो, ताकि कोई सबूत न बचे। औरत चाहे बाल्यावस्था में हो या वृद्धावस्था में, पुरुष को क्या केवल उसमें अपनी वासना शांत करने का उपाय ही दिखता है? अगर ऐसा ही है, तो उसके आसपास की कोई भी स्त्री सुरक्षित नहीं हो सकती।

इसमें दो राय नहीं कि पुलिस, प्रशासन, कानून- सब इतने कड़े हो जाने चाहिए कि ऐसे अपराधियों को बेहद सख्त सजा मिले। 2012 में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद लगा जैसे इन हरकतों पर अब रोक लग गई है। लेकिन जल्दी ही यह सोच गलत साबित हुई। हैदराबाद, उन्नाव, कठुवा तो सुर्खियों में आ गई कुछ घटनाएं हैं, देश के हर छोटे-बड़े कोने से न केवल स्त्री का बलात्कार करने, बल्कि उसे जला देने की खबरों के आंकड़ों मे बढ़ोतरी दिखती है। कई बर्बरता को देख कर यही लगता है कि वे अपराधी ऐसा कर कैसे पाते हैं!

यह पुरुषों की आपराधिक मानसिकता नहीं तो क्या है कि अब उस मर्दवादी विचार की चपेट में आए कुछ किशोर भी बलात्कार की घटनाओं में हिस्सा लेने लगे हैं। ऐसे लड़के के पैदा होने पर क्यों खुशी मनाई जाती है, प्रलाप क्यों नहीं किया जाता। समाज, धर्म, नैतिकता का ठेकेदार कहे जाने वाला पुरुष खुद कितना खोखला है, इसका परिचय तो आए दिन मिलता रहता है। कभी-कभी मन सोचने को मजबूर हो जाता है कि क्या सच में हमारा देश विकास कर रहा है! इसका उत्तर बलात्कार मामलों मे आई वृद्धि दे रही है। एक तरफ हुंकार लगाई जाती है कि महिला आज तरक्की कर रही है। बेशक कर भी रही है, पर पुरुष समाज भी कभी उसका शारीरिक तो कभी मानसिक बलात्कार करने से बाज नहीं आता। आखिर क्यों वह स्त्री को हर कदम पर डर कर रहने को मजबूर कर ही देता है? क्यों वह यह एहसास दिलाता है कि जैसे स्त्री शरीर पाकर किसी लड़की ने कोई गलती कर गई हो!
’अर्चना, रोहिणी पूर्व, दिल्ली

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