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चौपाल: बेहतर पहल

सन 1972 में अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत इनके प्रयोग पर प्रतिबंध लग चुका है। आज दुनिया में जिस तरह के आपसी विवाद और संघर्ष चलरहे हैं उससे तो युद्ध का खतरा और बढ़ जाता है।

Author Published on: September 7, 2019 5:37 AM
प्रतीकत्मक तस्वीर

हाल में खबर आई कि परमाणु, रासायनिक और जैविक हमले से निपटने के लिए भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों को तैयार किया जाएगा। यह पहल प्रसंशनीय तो है ही, साथ ही आपात स्थिति से निपटने हेतु कारगर कदम भी है। आज दुनिया में युद्ध के प्रमुख हथियारों के रूप में परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियार ही हैं। जैव प्रयोग द्वारा विषाणु या जीवाणु दुश्मन खेमे में छोड़ कर महामारी फैलाई जा सकती है। परमाणु हथियारों के निरस्त्रीकरण की दिशा को छोड़ कर जैविक हथियारों को एकत्रित करने की होड़ में कई देशों ने तो विषाणुओं को पूर्व से ही प्रयोगशालाओं में इकट्ठा करके रख लिया है। जबकि सन 1972 में अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत इनके प्रयोग पर प्रतिबंध लग चुका है। आज दुनिया में जिस तरह के आपसी विवाद और संघर्ष चलरहे हैं उससे तो युद्ध का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर भारत के वैज्ञानिक इस तरह के संकट से बचने के उपायों की दिशा में बढ़ रहे हैं तो यह प्रशंसनीय पहल है।
’संजय वर्मा, मनावर (धार)

मजबूत होते रिश्ते
भारत रूस के सुदूर पूर्व के विकास के लिए एक अरब डॉलर का कर्ज देगा। रूस के व्लादिवोस्तक शहर में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पहला देश था जिसने इस शहर में अपना वाणिज्य दूतावास खोला था। भारत ने सुदूर पूर्व में ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश किया है। रूस भारत का पुराना मित्र रहा है और वैश्विक पटल पर हमेशा भारत का समर्थन किया है, चाहे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हो या अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन हों। भारत और रूस दोनों ही देश अब अपने रिश्तों को इक्कीसवीं सदी के हिसाब से तैयार करना चाहते हैं। अमेरिका और रूस दोनों ही बड़े देश हैं और उनके अपने-अपने हित हैं। ऐसे में भारत को दोनों महाशक्तियों से अपने हित साधने जरूरी हैं। भारत-रूस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये शीत युद्ध के दौरान बने संबंधों के पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। आज के जमाने में दो देशों के बीच आर्थिक रिश्ते ज्यादा प्रगाढ़ होने चाहिए, उसके बाद ही उनके बीच अन्य संबंध मजबूत होते हैं। ऐसे में भारत-रूस के संबंध बहुत कमजोर रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार महज नौ करोड़ अमेरिकी डॉलर का ही है। भारत के पास मौका है कि वह भारतीय कंपनियों को वहां निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करे।
’प्रो. मोनू सिंह, बागपत

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