ताज़ा खबर
 

चौपाल: बाढ़ के पीछे व समझ से परे

केंद्र सरकार स्वयं कहती है कि डिजिटलाइजेशन के बहुत लाभ हैं।

Author Published on: September 3, 2019 4:17 AM
बहुमंजिला इमारतों, सड़कों, राजमार्गों का जाल बन गया है जिससे नदियों के प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गए हैं।

बाढ़ हमारे देश में अब एक स्थायी समस्या बन गई है। हर साल वही कहानी दोहराई जाती है। बाढ़ आती है, दौरे होते हैं, राहत पैकेज की बौछार होती है पर इस समस्या से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की जाती है। तैयारी होती है भी तो सिर्फ मंच पर भाषणों और फाइलों की कागजी कार्रवाई में। ऐसा नहीं है कि पहले बाढ़ नहीं आती थी। आती थी पर इसे लेकर गांव वाले तैयार रहते थे। पर अब बढ़ता शहरीकरण और विकास कार्य ही इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों, सड़कों, राजमार्गों का जाल बन गया है जिससे नदियों के प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गए हैं।

जो तटबंध बने हैं, वे टूट-फूट जाते हैं। बाढ़ के कई कारण हैं जैसे बड़े पैमाने पर रेत खनन, जंगलों का धीरे-धीरे समाप्त होना, नदियों की धारा को मोड़ना, उन पर बांध बनाना, तटबंधों की समय-समय पर मरम्मत नहीं कराना। बाढ़ की विभीषिका से बचने के लिए अनेक उपाय काम में लाया जाए सकते हैं जिनमें ढाल भूमि पर वृक्षारोपण, नदी तटबंधों का निर्माण, जल निकासी का प्रबंध, जलाशयों का निर्माण, नदियों की प्रवाह क्षमता में विस्तार आदि।

एक ओर प्रधानमंत्री डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की अपील करते हैं मगर दूसरी ओर डिजिटल लेन-देन पर शुल्क लगाते जा रहे हैं। अभी हाल में ऑनलाइन रेलवे टिकट बुक करवाने पर 15 से 25 रुपये सरचार्ज लगाने का फरमान जारी कर दिया गया है। इससे पहले ऑनलाइन भुगतान के लिए प्रयोग होने वाली स्वाइप मशीन पर भी मासिक शुल्क लगा दिया गया था और एटीएम के मात्रा से अधिक प्रयोग पर भी शुल्क लगा दिया गया था। होना तो यह चाहिए कि सड़कों पर भीड़ कम करने, ईंधन की बर्बादी रोकने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन लेन-देन पर छूट मिलती, मगर यहां तो उल्टी गंगा बहाई जा रही है।

केंद्र सरकार स्वयं कहती है कि डिजिटलाइजेशन के बहुत लाभ हैं। इससे कागज की खपत कम होती है, भीड़भाड़ से मुक्ति मिलती है, समय की बचत होती है, अपराधों पर लगाम लगती है तो फिर क्यों वह इसे हतोत्साहित करने का कार्य कर रही है? यह समझ से परे है।
सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, नई दिल्ली, आशुतोष प्रजापति, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 चौपाल: सुस्ती की आर्थिकी
2 चौपाल: बुनियादी शिक्षा का सच
3 चौपाल: अमेजन की आग