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चौपाल: उन्माद के विरुद्ध व बदहाल किसान

हर पाले को अपनी विचारधारा और अपने लोगों को बचाने की कोशिश छोड़नी होगी।

Author Published on: September 17, 2019 2:04 AM
सांकेतिक तस्वीर।

भीड़ द्वारा किसी को घेर क र मार दिया जाना यानी मॉब-लिचिंग किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है चाहे उसके लिए कितने भी कुतर्क गढ़ लिए जाएं। दरअसल, कोई भी समुदाय किसी पर प्रभुत्व तभी हासिल करना चाहता है जब वह असुरक्षा की भावना से पीड़ित हो। यह बुनियादी कारण है किसी भी हत्यारी भीड़ के मनोविज्ञान का। दूसरा कारण है बंद दरवाजों से आता बेशर्म राजनीतिक समर्थन जिसने इन खूंखार मंसूबों को ‘कुछ नहीं होगा’ के लबादे में ढांप दिया है। इस तरह घटनाओं की एक खास अंतराल के बाद पुनरावृत्ति का एक महत्त्वपूर्ण घटक है कानून एवं न्यायपालिका द्वारा कोई नजीर न मिलना।

अलवर के पहलू खान की हत्या के आरोपी सबूतों के अभाव में छोड़ दिए गए। यह अपराधियों को साहस देता है। मॉब-लिचिंग रोकने के लिए ऐसी घटनाओं पर त्वरित लेकिन निष्पक्ष जांच और कार्रवाई हो ताकि इनकी पुनरावृत्ति रुके और बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आकर ऐसी चीजों पर मुखरता से बात रखनी होगी। हर पाले को अपनी विचारधारा और अपने लोगों को बचाने की कोशिश छोड़नी होगी। याद रखिए ‘लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में…!’

’दीपक तैनगुरिया, दिल्ली विश्वविद्यालय

बदहाल किसान

सरकार किसानों की आय 2022 तक दुगनी करने की बात करती है वहीं नीति आयोग के मुताबिक 2011-12 से लेकर 2016-17 तक किसानों की आमदनी 0.44 फीसद प्रति वर्ष की रफ्तार से बढ़ी है। 2017-18 में यह शून्य फीसद और 2018-19 में तो शून्य से नीचे चली गई है। जब तक किसानों की आमदनी तय करने के लिए नीति निर्माताओं द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते तब तक किसानों की आत्महत्याएं रुकने वाली नहीं हैं।

’सुरज कुमार, प्रजापति मोहल्ला, पटना

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