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चौपाल: जनमत के विरुद्ध

बहुदलीय व्यवस्था में हजारों की संख्या में राजनीतिक दल पंजीकृत हैं और कुछ दल किसी चुनाव विशेष के लिए एक साथ आते हैं तो ऐसे में सवाल उठता है कि सिद्धांतविहीन दलों की आवश्यकता क्या है?

Author June 6, 2019 1:30 AM
अखिलेश यादव और मायावती (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन को स्थगित रखने की घोषणा की है। कल तक साइकिल पर हाथी की सवारी और गठबंधन की पैरोकारी कर रहे दोनों दलों के कार्यकर्ता और गठबंधन को वोट देने वाले मतदाता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बहुदलीय व्यवस्था में हजारों की संख्या में राजनीतिक दल पंजीकृत हैं और कुछ दल किसी चुनाव विशेष के लिए एक साथ आते हैं तो ऐसे में सवाल उठता है कि सिद्धांतविहीन दलों की आवश्यकता क्या है? कानून में चुनाव-पूर्व गठबंधन का प्रावधान कहां है? एक दल के चुनावी मंच पर दूसरे दल के नेताओं की मौजूदगी, उनके भाषण और उनके दलीय चुनाव चिह्न वाले झंडे-पोस्टर कानूनी दृष्टि से अवैध और अमान्य होने चाहिए। मतदाता स्वयं परिपक्व हैं। उन्हें गठबंधन के नाम पर भ्रमित करना कतई उचित नहीं कहा जा सकता है। बिहार में जनता दल (एकी) और राष्ट्रीय जनता दल ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़कर सफलता पाई थी लेकिन कुछ दिनों के बाद जनता दल (एकी) ने राष्ट्रीय जनता दल को ठेंगा दिखा दिया। यह जनमत का अपमान है, जो बंद होना चाहिए।
’अजिताभ सिन्हा, चित्रगुप्त नगर, खगड़िया

तंबाकू निषेध

दुनियाभर में इकतीस मई को हर वर्ष तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों में इसके सेवन से होने वाली घातक बीमारियों के बारे में जागरूकता आए। विश्व में लोग अलग-अलग रूपों में तंबाकू का सेवन करते हैं जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी, हुक्का आदि और इसमें निकोटिन होने के कारण यह मनुष्य के शरीर को बहुत हानि पहुंचाता है। तंबाकू से जुड़ी कई बीमारियों में से कैंसर सबसे घातक है। कैंसर से मृत्यु होने के मामले में यह बीमारी दूसरे नंबरपर विराजमान है और मुंह में कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया कीकुल जनसंख्या में से बारह प्रतिशत धूम्रपान करती है। धूम्रपान से कर्क रोग होता हैं, यह लिखा होने के बावजूद भारतीय इसका कश लगाते हैं। धूम्रपान की आदत युवाओं में बढ़ती जा रही हैं यह एक चिंता का विषय है। सिनेमाघरों और टीवी विज्ञापन के जरिए अभियान चलाया जाता हैं लेकिन लोगों में तंबाकू सेवन के प्रति घृणा पैदा नहीं होती। गुटखा और खैनी की बिक्री पर महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में पाबंदी है लेकिन इस नियम को ताक पर रखते हुए राज्यों में अवैध तरीके से और छुपा कर ग्राहकों को इसे पहुंचाया जाता है। इसे खाकर लोग सार्वजनिक स्थानों पर थूक कर देश को गंदा करते हैं जिससे अंतररष्ट्रीय मंचों पर भारत के छवि भी धूमिल होती है।
ग्रामीण क्षेत्र के लोग अशिक्षित होने के कारण इसके सेवन से होने वाले गंभीर परिणामों से वाकिफ नहीं हैं इसलिए बुजुर्ग से लेकर बच्चे भी गुटखा और खैनी का सेवन करते हैं। इससे उनके मुंह में संक्रमण हो जाता हैं जिसका महंगा इलाज इन्हें कराना पड़ता है। इस तरह तंबाकू का सेवन निर्धनता का भी कारण बनता है। पाबंदी होने के बावजूद कॉलेज और स्कूल के आसपास पान की दुकान देखने को मिलती हैं जहां बीड़ी-सिगरेट बेची जाती हैं और वहीं से युवाओं को इन हानिकारक चीजों की लत लगती है। वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं जिससे उनकी पढ़ाई पर भी असर होता है। इसलिए सरकार, स्कूल और कॉलेज में जन जागृति अभियान चलाकर तंबाकू के खिलाफ लड़ाई लड़ना जरूरी हो गया है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली, नागपुर

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