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चौपाल: कैसे रहबर

हास्यास्पद है कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के बारे में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की चिंता से कोसों दूर उसके स्वास्थ्य मंत्री केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने मीडिया की मौजूदगी में विश्व कप क्रिकेट के दौरान भारत-पाक मैच का स्कोर जानने में रुचि ले रहे थे।

Author Published on: June 21, 2019 1:42 AM
इस दंपती ने 13 जून को बिहार के मुजफ्फरपुर में Acute Encephalitis Syndrome (AES) से अपना बच्चा खो दिया। (Photo: PTI)

एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार से बिहार में हाहाकार मचा है। इस जानलेवा बीमारी से अब तक सूबे में 141 से ज्यादा मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया है। यह कोई नई बीमारी नहीं है बल्कि इससे पहले भी मुजफ्फरपुर में बच्चे इससे प्रभावित हो चुके हैं। बीमारी की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य सेवा की चिंता सरकार को न तो आज है न, पहले रही है। केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ राजग सरकार के सांसद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तक- सब अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए तरह-तरह के बयानों से जनता को दिग्भ्रमित करने में लगे हैं। कोई लीची को बहाना बना रहे हैं तो कोई वर्षा न होने को बीमारी का कारण बता रहे हैं। एक ओर मां के सामने बच्चे दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोते हुए चिंतन करने में लगे थे। सुशासन बाबू नींद से तब जागे जब सैकड़ों बच्चे काल के गाल में समा गए। प्रचंड बहुमत पाने वाले भाजपा, जद (एकी) और लोजपा नेताओं को अपने प्रदेश के नौनिहालों की तनिक भी चिंता होती तो स्वास्थ्य सेवा के मुद्दे पर निरर्थक ब्यानों के जरिए सरकार का बचाव करते नजर नहीं आते।

हास्यास्पद है कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के बारे में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की चिंता से कोसों दूर उसके स्वास्थ्य मंत्री केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने मीडिया की मौजूदगी में विश्व कप क्रिकेट के दौरान भारत-पाक मैच का स्कोर जानने में रुचि ले रहे थे। अफसोसनाक है कि कुछ मीडिया एंकर सरकार की विफलता पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बता कर उसे रोगियों की सेवा करने और अस्पताल जाकर सफाई करने की नसीहत देते हैं। दुखद है कि मीडियाकर्मी बार-बार डॉक्टरों को कोसने से भी बाज नहीं आ रहे। उन्हें कौन बताए कि सुविधाएं उपलब्ध करना सरकार की जिम्मेदारी है न कि डॉक्टर्स या विपक्ष की। सवाल है कि लोगों ने वोट स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसे मुद्दे पर नहीं दिया था तो फिर आज उन नेताओं से इन मुद्दों पर सवाल भी किस मुंह से पूछे? लोकतंत्र में नेताओं की मनमानी इतनी बढ़ जाए कि जनहित के मुद्दे पर सोचने के लिए उनके पास समय नहीं हो तो फिर यकीनन आमजन को गहन चिंतन-मनन की आवश्यकता है।
’मंजर आलम , रामपुर डेहरू, मधेपुरा, बिहार

नशे का जाल
इन दिनों अब पंजाब के साथ-साथ हिमाचल और हरियाणा के युवाओं में भी नशे की लत बढ़ती जा रही है। नशे ने बड़ी संख्या में घर उजाड़ कर रख दिए हैं। नशाखोरी का इलाज करवाने वालों की बढ़ती संख्या से इस समस्या की गंभीरता का पता चलता है। इस संख्या में पिछले दस सालों में दस गुना वृद्धि हुई है। कभी इन तीनों राज्यों में दूध और घी की नदियां बहा करती थीं और कहां अब शराब की बाढ़ आई हुई है जो युवाओं को अपने साथ बहा कर ले जा रही है।
शराब के अलावा अन्य अधिकतर नशीले पदार्थ इन तीनों राज्यों में पाकिस्तान से आते हैं लेकिन इन्हें फैलाने वाले हमारे अपने ही लोग हैं, जिनमें पुलिस और अन्य विभागों के कर्मचारी-अधिकारी भी शामिल हैं। इस सबको देखते हुए सरकार को कड़े फैसले लेने होंगे और जल्द से जल्द नशा तस्करों पर नकेल कसनी होगी।
’राघव जैन, जालंधर

 

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