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चौपालः असुरक्षित डाक्टर

इसमें कोई दो मत नहीं कि धरती पर भगवान का रूप कहे जाने वाले डाक्टरों की जिंदगी इन दिनों दाव पर लगी है। एक तरफ उन्हें मरीजों के इलाज का दबाव और दूसरी तरफ खुद को संक्रमण से बचाने की चुनौती से जूझना पड़ रहा है।

Author Published on: April 4, 2020 12:50 AM
चौपालः शिक्षा की चुनौतियां।

कोरोना कहर के बीच डाक्टरों के लिए विकट स्थिति बन गई है। एक तरफ उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के अभाव में जान जोखिम में डाल कर कोरोना संक्रमितों का इलाज करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ मरीज के परिजनों द्वारा की जाने वाली मारपीट और गालीगलौच का भी सामना करना पड़ रहा है। इंदौर में हाल में इस तरह की घटनाओं में डाक्टरों को जैसे-तैसे अपनी जान बचा कर भागना पड़ा, जिनमें महिला डाक्टर भी शामिल थीं। उधर दिल्ली में हिंदूराव अस्पताल में रोज दो से तीन डाक्टर और नर्स सुरक्षा उपकरणों जैसे मास्क, सैनेटाइजर और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) आदि के अभाव में इस्तीफे की पेशकश कर रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन द्वारा इस्तीफा देने वालों को सख्त चेतावनी दी जा रही है।

इसमें कोई दो मत नहीं कि धरती पर भगवान का रूप कहे जाने वाले डाक्टरों की जिंदगी इन दिनों दाव पर लगी है। एक तरफ उन्हें मरीजों के इलाज का दबाव और दूसरी तरफ खुद को संक्रमण से बचाने की चुनौती से जूझना पड़ रहा है। इसके अलावा मरीजों के परिजनों के बुरे बर्ताव, पत्थरबाजी और गालीगलौच का भी सामना करना पड़ रहा है जो कि निंदनीय ही नहीं, शर्मनाक और अमानवीय भी है। इंदौर की घटना में तो डाक्टरों पर थूकने तक की हरकत की गई। मरीज के परिजनों को धैर्य और संयम बरतना चाहिए। उन्हें समजना चाहिए कि संकट की इस घड़ी से बचाव का एकमात्र जरिया ये निहत्थे सैनिक डाक्टर ही हैं। यह समझना चाहिए कि कोरोना युद्ध में ये डाक्टर मोर्चे पर लड़ रहे हैं और हम घरों में बैठे हैं। अफसोस यह भी है कि हमारे इन डाक्टर रूपी सैनिकों के पास खुद के बचाव के पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी नहीं है। उन्हें खुद के संक्रमित होने का खतरा भी है। ऐसे में डाक्टरों की सेवाएं प्रणम्य है। हमें उनका उत्साह बढ़ाते हुए साथ देना चाहिए, न कि उन पर पत्थर बरसाना चाहिए। ऐसा करने से हमारा ही नुकसान होगा। अगर डाक्टर काम करना बंद कर देंगे तो इस आपात स्थिति में मरीजों का इलाज कौन करेगा। अत: मरीज के परिजन धैर्य और संयम के साथ डाक्टरों से सहानुभतापूर्ण तरीके से पेश आएं, इसी में सबकी भलाई है। हमें डाक्टरों का मनोबल ऊंचा रखना होगा। कोरोना से जंग में यही डाक्टर हमारे रक्षक हैं।
-देवेंद्र जोशी, उज्जैन

शर्मनाक हरकत
देश में फैले कोराना वायरस संक्रमण से लोगों की जान बचाने वाले देश के स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मी जो मुश्किल की इस घड़ी में समाजसेवा में लगे हैं, पूरा देश आज इनके साथ खड़ा है और उनके जज्बे को सलाम करता है। लेकिन हाल में इंदौर में डाक्टरों की टीम पर किया गया हमला निंदनीय है। साथ ही, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जमात के लोगों द्वारा अस्पताल की नर्सों, डाक्टरों के साथ जिस तरह की हरकतें सामने आई हैं, उनसे सभी का मन दुखी हुआ। इस घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। ऐसे परस्त लोगो को सख्त से सख्त सजा देना चाहिए।
-पूनम चंद सीरवी, कुक्षी (मध्य प्रदेश)

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