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चौपाल: कैसा समाज

कहानी में संयोग कुछ ऐसा बना कि अचानक एक ट्रक पीड़िता की गाड़ी से टकरा जाता है और उसकी चाची और मौसी मौके पर ही हलाक हो जाती हैं। वकील और खुद पीड़िता मरणासन्न हैं।

truckये वही ट्रक है जो उस कार से टकराया जिसमें उन्नाव रेप पीड़िता, उसके रिश्तेदार और वकील थे। (फोटो: पीटीआई)

एक सांसद ने आदतन संसद में एक महिला सांसद पर तंज किया। हमें बहुत बुरा लगा। मीडिया आहत! समाज आहत! होना भी चाहिए। एक विधायक महोदय बलात्कार के आरोप में सलाखों के पीछे सुरक्षित हैं। जबकि उधर पहले पीड़िता के बाप को मारा गया, फिर एक गवाह का काम तमाम हुआ और फिर चाचा को जेल में प्रताड़ित किया गया। इसके बाद की कहानी में संयोग कुछ ऐसा बना कि अचानक एक ट्रक पीड़िता की गाड़ी से टकरा जाता है और उसकी चाची और मौसी मौके पर ही हलाक हो जाती हैं। वकील और खुद पीड़िता मरणासन्न हैं। लेकिन बेहद मासूम हम बाकायदा ‘कन्फ्यूज’ हैं कि ये घिनौनी हरकतें कौन कर सकता है; कि इस मुसल्सल घटनाक्रम का लाभार्थी कौन हो सकता है! घिन आती है कि हम ऐसे समाज का हिस्सा हैं जिसे घृणित कामों से कोई खास सरोकार नहीं है, बल्कि उसकी लानत-मलामत तो इस बात से तय होती है कि उन्हें अंजाम देने वाला व्यक्ति विशेष कौन है!
’राहुल मिश्रा, चिरगांव, झांसी

खुद से शुरुआत
अगर हम 250 ग्राम का मोबाइल और 300 ग्राम का ‘पावर बैंक’ अपनी जेब में रख सकते हैं तो 30 ग्राम का कपड़े का थैला क्यों नहीं? बढ़ता हुआ प्लास्टिक हमारे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग और इसके खतरों पर चिंता तो सब जताते हैं लेकिन उसे रोकने या कम करने के लिए आज तक कितनों ने क्या किया? ग्राहक दुकानदार से कपड़े का थैला रखने को कहता है और दुकानदार ग्राहक को थैला साथ लाने के लिए कहता है। दुकानदार को कपड़े के थैले में सामान देना महंगा सौदा लगता है और पर्यावरण के लिए वह यह नुकसान सह ले, ऐसे निस्वार्थी दुकानदार बहुत कम हैं।

तो क्यों न शुरुआत हम खुद से करें! क्यों न हम सब्जी, फल या अन्य सामान लेने के लिए घर से कपड़े का थैला ले जाना शुरू कर दें? गाय, व्हेल मछलियां जैसे हजारों अन्य जीव-जंतुओं की हर साल प्लास्टिक खाने से मौत हो जाती है। गंदगी हम लोग फैलाते हैं और उसकी कीमत मासूम जीव-जंतुओं को चुकानी पड़ती है! क्या यह उचित है? क्या हमें यह सब रोकना नहीं चाहिए? अगर रोकना चाहते हैं तो सिर्फ एक तीस ग्राम का कपड़े का थैला अपने साथ रखना है ताकि प्लास्टिक से दूरी बनाए रखें। शुरुआत आज, अभी से करें।
’संदीप राणा, जामिया मिल्लिया, दिल्ली

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