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चौपाल: जाधव को इंसाफ

पाकिस्तान ने निर्दोष जाधव को अपनी कैद में रखते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का जो फैसला आया है, उसमें भारत के लिए तब और बड़ी खुशी की बात होनी थी जब जाधव को रिहा करने का आदेश पाकिस्तान को दिया जाता।

Author Published on: July 23, 2019 1:43 AM
कुलभूषण जाधव।

कुलभूषण जाधव को लेकर हेग अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला भारत के पक्ष में आना साबित करता है कि पाकिस्तान में न्यायतंत्र सेना के हाथ की कठपुतली है। पाकिस्तान ने निर्दोष जाधव को अपनी कैद में रखते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का जो फैसला आया है, उसमें भारत के लिए तब और बड़ी खुशी की बात होनी थी जब जाधव को रिहा करने का आदेश पाकिस्तान को दिया जाता। खैर, अब देखना होगा कि पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस फैसले के बाद अपनी घटिया और मानवता विरोधी कम करते हैं या फिर ढाक के तीन पात का अनुसरण करते हुए अपने सत्ताधारियों और सेना पर दबाव बना कर भारत के प्रति जहर उगलने के लिए उकसाते हैं।

भारत को इस बात का भी खयाल रखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के इस फैसले के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में आकर अपनी नापाक हरकतों में तेजी ला सकता है। भारत को पाक जेलों में बंद भारतीयों पर भी कड़ी नजर रखने के उपाय करने होंगे, यह न हो पाकिस्तान जाधव के फैसले की बौखलाहट में आकर उन्हें परेशान करने की कोशिश करे। वैसे इमरान खान को चाहिए कि खुद ही समझदारी बरतते हुए जाधव मामले में विश्व में अपनी किरकिरी होने से बचाने के लिए उन्हें बिना किसी देरी और शर्त के रिहा करके भारत को सौंप दें। पर यह नामुमकिन लगता है क्योंकि इमरान खान भी तो वहां के कट्टरपंथियों और सेना के ही हाथों की कठपुतली हैं। ऐसे में यह भी संभव है कि पाकिस्तान नया पैंतरा अपना कर जाधव को फांसी का फैसला वापस ले ले। अंत में यह कहना उचित होगा कि जब तक पाकिस्तान के कट्टरपंथी भारत के प्रति अपनी घटिया मानसिकता नहीं बदलते, तब तक भारत-पाकिस्तान के रिश्ते मधुर नहीं हो सकते।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर

समेकित विकास

दुनिया के कुल 130 करोड़ गरीबों में से आधे 18 साल से कम उम्र के हैं और उनमें भी दस साल से कम उम्र वाले बच्चों की तादाद लगभग एक तिहाई है। क्या इन नए आंकड़ों के मद्देनजर केंद्र सरकार अपनी आर्थिक विकास पर आधारित नीतियों की जगह समेकित विकास की नीति लाने की कोशिश करेगी? ऐसा करने का मतलब होगा किसी गांव या शहर की गरीब बस्ती में आय बढ़ाने के साथ ही बिजली, पानी, शिक्षा, रसोई गैस, अस्पताल आदि की सुविधा मुहैया कराना। हैरानी की बात है कि नई परिभाषा के तहत गरीबी केवल निर्धन, निम्न या निम्न-मध्य आय वाले देशों में ही नहीं, मध्यम आय वाले देशों में भी बड़ी संख्या में है। यानी 130 करोड़ में 88.6 करोड़ गरीब हैं। यह सरकारों के लिए संदेश है कि आय तो बढ़ाएं, लेकिन इससे बहुआयामी अभाव को भी कम करने के उपक्रम करें।
हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

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