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चौपाल: संकट के बादल

जून माह से किसान और पशुपालक भरपूर बरसात की राह देख रहे हैं। अब जुलाई महीना भी बीत गया है लेकिन तरबतर करने वाली बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।

Author August 3, 2019 2:44 AM
दिल्ली भी अच्छी बारिश के इंतजार में है।

पश्चिम राजस्थान सहित प्रदेश के कई भागों को अब तक अच्छी बारिश का इंतजार है। यहां सूखी धरती भीगी जरूर है, लेकिन उसकी प्यास अभी अधूरी है। बरसात के इंतजार में किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। पशुपालक चिंता में डूबे हुए हैं लेकिन सबसे अहम समस्या है कि बरसात के मौसम में भी पानी संकट बना हुआ है। भरपूर बारिश से सभी समस्याओं का एक साथ समाधान संभव है, लेकिन यह सब भगवान भरोसे है। कुल मिलाकर सौ मर्ज की एक दवा बरसात है।

जून माह से किसान और पशुपालक भरपूर बरसात की राह देख रहे हैं। अब जुलाई महीना भी बीत गया है लेकिन तरबतर करने वाली बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। अब तक जो थोड़ी-बहुत बरसात हुई है उससे हल्की-सी नव अंकुरित घास का स्वाद भेड़-बकरियों के मुंह में जाने लायक हुआ था पर बरसात के अभाव में यह घास भी जलने के कगार पर है। बड़े पशुओं, खासकर गायों के खाने के लायक घास कहीं नहीं है। फिलहाल संकट के बादल आम जन और खेती के साथ-साथ पशुधन पर भी मंडरा रहे हैं। बरसात नहीं होने के कारण इस बार टांकों-नाडियों पुरातन जलस्रोतों में पानी की आवक नहीं के बराबर है।

नतीजतन, पानी की जरूरत के लिए जलदाय विभाग के स्रोतों पर ही सभी की निर्भरता बनी हुई है। हालत यह है कि बरसात के मौसम में भी जलसंकट से जूझ रहे हैं। इस बिगड़ते संतुलन को देखते हुए सरकार और नागरिकों को चाहिए कि वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें व उनका संरक्षण करें। वर्षा जल के संरक्षण व समुचित संग्रह के लिए आवश्यक कदम उठा कर जल संकट से उबरा जा सकता है। जरूरत है, समय रहते कदम उठाने व उनके क्रियान्वयन करने की।
’रावत गर्ग ऊण्डू, राजबेरा, बाड़मेर, राजस्थान

मुफ्त का जाल
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने 200 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल माफ करने का ऐलान किया है। विधानसभा चुनाव के पूर्व इस प्रकार की घोषणा मतदाताओं को रिझाने का प्रयास है। वैसे इन दिनों सभी दल मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के लिए अपने-अपने तरीके से चुनावों से पहले ‘मुफ्त’ का जाल डालते रहते हैं। ऐसी घोषणाएं अनुचित हैं जो जनता को निकम्मा तो बनाती ही हैं, अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक हैं।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

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