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चौपाल: आतंक के खिलाफ

अब बारी धारा 370 व 35 अ को समाप्त करने की है। सरकार को इस बारे में ठोस निर्णय लेकर कश्मीर को आतंक से मुक्त करना चाहिए।

Author Published on: August 1, 2019 2:30 AM
अमित शाह (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस-फाइल फोटो)

कश्मीर में आतंकियों का वित्त पोषण करने वाली जड़ों पर वार होने से वहां की अलगाववादी ताकतें फड़फड़ा रही हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के शिकंजे के कारण आतंकवाद की कमर टूट रही है, यह अच्छी खबर है। देश की पूर्ववर्ती सरकारों ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए इतनी ही सूझबूझ और ताकत दिखाई होती तो न कश्मीर घाटी से पंडितों को पलायन करना पड़ता और न वहां आतंकवाद इतना बढ़ पाता। अब बारी धारा 370 व 35 अ को समाप्त करने की है। सरकार को इस बारे में ठोस निर्णय लेकर कश्मीर को आतंक से मुक्त करना चाहिए।
’मंगलेश सोनी, मनावर, धार, मध्यप्रदेश

जंगल की जगह
हम और हमारी धरती एक खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं। इसी डर ने हमें पेड़ लगाने और पानी बचाने की तरफ मोड़ दिया है। बच्चों की ड्राइंग से गायब होते प्राकृतिक दृश्यों को फिर से बनाने की कोशिश में पौधारोपणउजड़ते जंगलों की जगह लेंगे जो आने वाली पीढ़ी के लिए एक खुशखबरी बन सकती है। मगर यहीं से हमारी कोशिशों पर कुछ सवाल भी खड़े होते हैं। क्या सचमुच नए जंगल बसाने के प्रयासों में हम ईमानदार हैं? तुलसी या सजावटी पाम जैसे पौधे लगा कर हम कितने घने जंगल बनाने में कामयाब होंगे? तरक्की की देन कंक्रीट के जंगलों ने फलदार और छायादार पौधों के लिए जगह नहीं छोड़ी है। हमें वह जगह तलाशनी होगी जहां हरे वृक्षों के घने जंगल की वसीयत आने वाली पीढ़ी के नाम कर सकें।
’एमके मिश्रा, रातू, रांची, झारखंड

डर के आगे
अपने रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने साफ कह दिया है कि जो लोग कश्मीर के विकास की राह में रोड़ा बन रहे हैं और नफरत फैलाना चाहते हैं, उनके नापाक इरादे कामयाब होने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री की ओर से ऐसे किसी बयान की आवश्यकता इसलिए थी कि एक तो इन दिनों कश्मीर चर्चा के केंद्र में है और दूसरे, केंद्र सरकार से यह अपेक्षा बढ़ गई है कि वह घाटी को पटरी पर लाने के लिए हरसंभव उपाय करे। गृहमंत्री बनने के बाद से अमित शाह कश्मीर पर खास ध्यान दे रहे हैं। सबको भरोसा है कि मोदी-शाह कीजोड़ी कश्मीर की समस्याओं को सुलझा कर रहेगी। बीते दिनों कश्मीर में सुरक्षा बलों की सौ अतिरिक्त कंपनियां बुलाने के साथ ही वहां राजनीतिगरमा गई। बयान सामने आने लगे कि धारा 35 ए को हाथ भी लगाया तो सारा कश्मीर सुलग उठेगा जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि ये कंपनियां सिर्फ कश्मीर की सुरक्षा के लिए तैनाती की गई हैं।

कैसी विडंबना है कि एक तरफ केंद्र सरकार आतंकवादियों और अलगाववादियों पर नकेल कस रही है तो दूसरी तरफ घाटी के नेता आतंकवादियों और अलगाववादियों की वफादारी कर रहे हैं। इस सबके बीच मासूम कश्मीरियों की आवाज दब रही है। क्या उन्हें निडर होकर जीने का हक नहीं? आएदिन के आतंकी हमले उन्हें डर की जिंदगी जीने को मजबूर कर रहे हैं। कर्फ्यू या पत्थरबाजी से कश्मीरी बच्चों की शिक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ता रहा है। सरकार अब आतंकी वित्त पोषण पर रोक लगाने के सख्त प्रयास लगातार कर रही है जिस कारण पत्थरबाजी कम हुई है। सरकार के कड़े रुख से लगता है कि कश्मीर के हालात जल्द बदलेंगे।
’राघव जैन, जालंधर

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