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चौपाल: संकट में रोजगार

रिटेल कारोबार, वितरण और निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा छंटनी हुई है। सरकारी कारखानों में भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। पिछले दिनों बीएसएनएल के पास कर्मचारियों के वेतन के लिए पैसे नहीं थे।

Author August 5, 2019 3:03 AM
वाहन कलपुर्जे उद्योग में दस लाख नौकरियां जाने का अंदेशा है।

देश में आए दिन बड़ी-बड़ी कंपनियों से नौकरियां जाने की खबरें आ रही हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। कुछ दिन पहले एक खबर आई कि वाहन कलपुर्जे उद्योग में दस लाख नौकरियां जाने का अंदेशा है। कई जगहों पर तो छंटनी भी शुरू हो गई है। इसी तरह मोबाइल हैंडसेट उद्योग में साल भर में ढाई लाख नौकरियां चली गईं। रिटेल कारोबार, वितरण और निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा छंटनी हुई है। सरकारी कारखानों में भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। पिछले दिनों बीएसएनएल के पास कर्मचारियों के वेतन के लिए पैसे नहीं थे। इसी तरह जेट एअरवेज की भी स्थिति किसी से छुपी नहीं है। देश में आने वाले समय में बेरोजगारी भयावह रूप धारण कर सकती है।
’मोहम्मद आसिफ, जामिया नगर, दिल्ली

बेतुका बयान
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। जो हाथ 35ए के साथ छेड़छाड़ करने के लिए उठेंगे, वे हाथ ही नहीं सारा जिस्म जल के राख हो जाएगा। महबूबा मुफ्ती के इस बयान के बाद देश में उनके इस बयान की काफी आलोचना हो रही है। इस बयान के बाद लोग उन्हें पाकिस्तानी प्रेमी भी कहने लगे हैं। महबूबा मुफ्ती के इस बयान से तो एक बात साफ हो गई कि वे किसी हालात में 35ए को खत्म नहीं होने देना चाहतीं। अगर यह धारा खत्म हो गई तो सबसे ज्यादा खतरा आतंकी संगठनों को होगा जो कश्मीर में अपनी पैठ बना चुके हैं। सवाल है कि अगर धारा 35ए खत्म कर दी जाती है तो महबूबा मुफ्ती को इससे क्या डर है? क्या वे आतंकवादियों की हमदर्द हैं?
’योगेंद्र गौतम, उन्नाव

ट्रंप का शिगूफा !
भारत जब आजाद हुआ तो भारत की सत्ता छोड़ कर जा रहे अंग्रेजों और भारत के स्वार्थी नेताओं ने देश विभाजन का दंश और कश्मीर विवाद को जन्म दिया जो आज तक चला आ रहा है। इसकी वजह से हीकश्मीर में आतंकवाद खूब फला-फूला। भारत ने निरंतर इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और झूठ बोला कि भारत के प्रधानमंत्री ने कश्मीर विवाद में उनसे मध्यस्थ्ता करने को कहा है। इस बयान ने न सिर्फ भारतीय राजनीति में बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भी हलचल पैदा कर दी। भारत ने तुरंत अपना रुख स्पष्ट किया कि कश्मीर विवाद सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान ही वार्ता करेंगे, इसमें किसी तीसरे पक्ष की आवश्यकता नहीं है। आज भारत एक शक्तिशाली देश और हर आंतरिक समस्या का समाधान खुद कर सकता है। ट्रंप को अगर विवाद ही सुलझाने है तो ईरान, चीन, अफगानिस्तान, उत्तर कोरीया, मैक्सिको आदि के साथ ही विवाद सुलझाए।
’सुनील कुमार सिंह, मेरठ

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