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चौपाल: दोहरा मानदंड, गोटबाया और भारत व घोटालों पर घोटाले

नि:शुल्क के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहुत जरूरी है और शिक्षा ऐसी हो जो सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करनें में सक्षम हो।

Author Published on: November 20, 2019 3:15 AM
गोटबाया भले सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हों, पर उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

आपके अखबार में प्रकाशित मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का लेख पढा, जो कि यूनेस्को में दिए गए उनके भाषण का अंश है। इस भाषण में मंत्री महोदय ने जो प्रमुख बातें कही हैं, उनमें से एक प्रमुख बात यह है कि वह अपने देश में नि:शुल्क और गुणवत्त्तापूर्ण शिक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं। जबकि हकीकत यह है कि सरकार शिक्षा को लेकर दोहरे मानदंड अपना रही है। एक तरफ तो नि:शुल्क शिक्षा की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- जेएनयू में फीस में भारी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इसी मुद्दे पर पिछले कुछ दिनों से जेएनयू में अशांति का माहौल है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फीस वृद्धि के विरोध में छात्र-छात्राएं धरने पर हैं। उनकी मांगें हैं कि बढ़ी हुई फीस के फैसले को वापस लिया जाए और वाइस चांसलर उनसे लोकतांत्रिक तरीके से बात करें। लेकिन सरकार बात करने के बजाय प्रदर्शनकारी छात्रों के दमन पर उतारू है। पुलिस ने जिस बेरहमी से प्रदर्शनकारी छात्रों को धुना है, वह निंदनीय है।

एक और बात जिसमें मंत्री जी ने जोर देकर कहा है कि विदेशी छात्रों के लिए नि:शुल्क शिक्षा। हां यह बात सही है कि हमारे यहां विदेशों से छात्र पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन पहले यह जरूरी है कि हम अपने देश को साक्षर बनाएं और भारत में नि:शुल्क शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। नि:शुल्क के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहुत जरूरी है और शिक्षा ऐसी हो जो सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करनें में सक्षम हो।

’संदीप कुमार, प्रयागराज

घोटालों पर घोटाले

पंजाब महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में घोटाले के कारण उसके ग्राहकों की मुश्किलें अभी खत्म भी नहीं हुईं कि उत्तर प्रदेश में यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड में 2268 करोड़ रुपए का पीएफ घोटाला सामने आ गया। अब उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग के कर्मचारियों की नींद उड़ी हुई है कि कहीं उनका पैसा न डूब जाए। हम देख रहे हैं कि विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे बड़े घोटालेबाज पैसा खाकर भाग निकले, लेकिन अभी तक किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। लगता है कि पीएमसी बैंक के घोटालेबाज और यूपी पावर कारपोरेशन में पीएफ घोटाला करने वाले भी ऐसे ही मजे करते रहेंगे।

’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

गोटबाया और भारत

श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में श्रीलंका फ्रीडम पार्टी की जीत और टर्मिनेटर के नाम से जाने वाले पूर्व रक्षा मंत्री गोटबाया राजपक्षे का राष्ट्रपति बनना भारतीय उपमहाद्वीप के लिए कोई बहुत अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। सब जान रहे हैं कि गोटबाया ने यह चुनाव धार्मिक एवं नस्लीय ध्रुवीकरण के कारण जीता है। पिछले साल अप्रैल में ईस्टर के मौके पर चर्चों में हुए धमाकों के वजह से वहां के अल्पसंख्यक मुसलमानों का बहिष्कार शुरू हो गया। सिंहली समुदाय, न सिर्फ मुसलमानों को बल्कि अन्य दूसरे अल्पसंख्यकों को, जिनमें तमिल भी शामिल हैं, को दुश्मन के नजरिये से देखता है। गोटबाया भले सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हों, पर उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। चीन का दबदबा और बढ़ने वाला है। उसका कर्ज नहीं चुकाये जाने के एवज में, 2017 में ही, हंबनटोटा बंदरगाह का स्वामित्व चीन को सौंपा जा चुका है। आगे बहुत कुछ चीन के हाथो में जा सकता है जिससे हिंद महासागर में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

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