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चौपाल: विलंबित न्याय

बेहतर होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और साथ ही विधायिका यह महसूस करें कि न्यायिक तंत्र की मौजूदा स्थिति देश के अपेक्षित विकास में रोड़े अटकाने का काम कर रही है।

Author July 6, 2019 2:23 AM
सुप्रीम कोर्ट (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

न्याय में देरी से भारतीय समाज कानून के शासन के प्रति वैसा प्रतिबद्ध नहीं दिखता जैसा उसे दिखना चाहिए। केवल इतना नहीं, न्याय में देरी की समस्या समाज को अनुशासित बनाने में भी बाधक बन रही है। बेहतर होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और साथ ही विधायिका यह महसूस करें कि न्यायिक तंत्र की मौजूदा स्थिति देश के अपेक्षित विकास में रोड़े अटकाने का काम कर रही है। आज चाहे आम लोग हों या खास, वे इस पर भरोसा नहीं कर पाते कि अदालतों से उन्हें समय पर न्याय मिलेगा। भरोसे की यह कमी न्यायतंत्र की प्रतिष्ठा और गरिमा पर एक सवाल ही है।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

गरिमा का तकाजा
लोकसभा में सांसद द्वारा अपने भाषण के बाद नारेबाजी करने की नई परंपरा स्थापित किए जाने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा जाहिर की गई आपत्ति बिल्कुल जायज और सराहनीय है। निस्संदेह संसदीय परंपरा का निर्वाह करना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्हें सिर्फ अपनी बात सदन में रखनी चाहिए। रवि किशन और हंसराज हंस सरीखे भाजपा सांसदों को इस संदर्भ में टोक कर लोकसभा अध्यक्ष ने पूरे सदन को आगाह किया है। आवश्यक है कि इसके लिए पार्टी अध्यक्ष अपने-अपने नेताओं को सख्त निर्देश दें ताकि बार-बार सांसदों को टोकना न पड़े।
’मंजर आलम, रामपुर डेहरू, मधेपुरा

दिखावे की कार्रवाई
हाफिज सईद पर पाकिस्तान अचानक शिकंजा कस रहा है। हाफिज समेत उसके बारह सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए अवैध धन जुटाने के संबंध एफआइआर दर्ज की गई है! यह सच्चाई है या सपना? भारतीय विदेश मंत्रालय ने बिलकुल सही कहा कि यह एक और नौटंकी है। दिखावे की यह कार्रवाई भारत को खुश करने के लिए नहीं बल्कि अमेरिका को खुश करने के लिए की गई है। इमरान खान बाईस जुलाई को अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात होनी है। आखिर उन्हें मुंह दिखाने लिए कुछ तो कदम उठाने थे। उसी के मद्देनजर यह नौटंकी की गई है।

अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को अब न के बराबर आर्थिक मदद मिल रही है। पाकिस्तान की माली हालात दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। पुराने लिए गए ऋण का ब्याज चुकाने के लिए उसे नया ऋण लेना पड़ रहा है। भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे विश्व बैंक/ आइएमएफ को यह अच्छी तरह समझा देना चाहिए कि पाकिस्तान के पुराने रिकार्ड को देखते हुए ऋण इसी शर्त पर दिया जाए कि वह आतंकी गतिविधियों को त्याग दे। अगर ऐसा हो जाता है तो यह अचूक एवं कारगर उपाय होगा पाकिस्तान को सही रास्ते पर लाने के लिए।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

 

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