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चौपाल: हादसों का सबक

यह जानकारी हासिल करने वाले सूचनाधिकार कार्यकर्ता व सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि उन्होंने तेज ड्राइविंग के खतरों पर लगाम लगाने के लिए सरकारी एजेंसियों को लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

Author July 10, 2019 4:46 AM
बस यमुना एक्सप्रेस-वे से करीब तीस फुट गहरे नाले में जा गिरी।

यमुना एक्सप्रेस-वे एक बार फिर सुर्खियों में है। सुर्खियों की वजह कोई नई नहीं है। इस एक्सप्रेस-वे पर जानलेवा हादसे आम बात हो गए हैं। यातायात पुलिस निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक यमुना एक्सप्रेस-वे पर इस साल जनवरी से जून 2019 तक 95 दुर्घटनाएं हुर्इं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 120 लोग घायल हुए। इसी साल अप्रैल में सूचनाधिकार कानून के तहत मिली जानकारी से इस बात का खुलासा हुआ कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर अगस्त, 2012 से 31 मार्च, 2018 के बीच कुल 4,956 दुर्घटनाएं हुर्इं जिनमें 718 लोगों की मौत हुई और 7,671 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

यह जानकारी हासिल करने वाले सूचनाधिकार कार्यकर्ता व सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि उन्होंने तेज ड्राइविंग के खतरों पर लगाम लगाने के लिए सरकारी एजेंसियों को लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक यमुना एक्सप्रेस-वे की गतिविधियों पर एक स्वतंत्र एजेंसी को निगरानी रखनी चाहिए और गति उल्लंघन के बारे में जेपी इंफोटेक से प्राप्त जानकारी भी साझा की जानी चाहिए। इस मार्ग पर ड्राइवर न केवल गति सीमा का उल्लंघन करते हैं, बल्कि बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के गाड़ियां चलाते हैं। स्वचालित निगरानी गैजेट और नंबर प्लेट रीडर द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त 2012 से मार्च 2018 के बीच 2.33 करोड़ वाहनों ने गति सीमा का उल्लंघन किया लेकिन उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाता है और वे आराम से बच निकलते हैं।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 23.42 प्रतिशत दुर्घटनाएं तेज गति और 12 प्रतिशत टायर फटने के कारण हुर्इं। इसके अलावा ओवर टेकिंग (15 फीसद), नींद का आना (दस फीसद) और बीच रास्ते में खड़े वाहन (5 फीसद) हादसे की प्रमुख वजह हैं। एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसों को लेकर केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने भी एक रिपोर्ट तैयार की थी और कुछ उपाय सुझाए थे लेकिन उन्हें आज तक अमल में नहीं लाया जा सका है। इनमें सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने, रास्ते में जगह-जगह छोटे स्पीड ब्रेकर लगाने की भी बात कही गई थी, जिससे वाहन चलाने वाला चौकन्ना रहे और गति ज्यादा न रख सकें।

इसके साथ ही अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की तरह टायरों के निर्माण में रबड़ के साथ सिलिकॉन डाला जाना चाहिए। इससे अधिक गति पर टायर का तापमान बढ़ने से उसके फटने की शिकायतें कम हो सकती है। साथ ही टायरों में नाइट्रोजन भरनी चाहिए जिससे टायर ठंडा रहता है। इन दोनों बातों को यथाशीघ्र अनिवार्य बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।
’प्रियंबदा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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