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चौपाल: भ्रष्टाचार पर नकेल

परियोजनाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायतों और प्रभावशाली समूहों को शामिल करना होगा। हर विभाग में व्याप्त अनावश्यक कानूनों व प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त करना होगा जिनकी आड़ में कुछ अधिकारियों को भ्रष्ट आचरण करने का मौका मिलता है।

Author July 5, 2019 2:08 AM
नौकरशाही के भ्रष्टाचार को दो वर्गों में बांटा जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अफसरशाही के भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार को अपनी रणनीति दो स्तरों पर बनानी होगी और नवीनतम टेक्नोलॉजी का सहारा लेना होगा। नौकरशाही के भ्रष्टाचार को दो वर्गों में बांटा जा सकता है। पहला उच्च स्तर, जो जनता के ध्यान में नहीं आता पर देश के विकास में यह सबसे बड़ी बाधा है। दूसरी श्रेणी का भ्रष्टाचार स्थानीय है जिससे आम आदमी हर रोज दो-चार होने को मजबूर है। उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार पर नकेल डालने के लिए हर विभाग में अल्पकालिक व दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करने होंगे। विकास परियोजनाओं के संपूर्ण होने पर ही नहीं बल्कि बीच-बीच में भी उनकी समीक्षा करनी होगी और हर चरण के लिए जिम्मेवारी तय करनी होगी। बड़ी परियोजनाओं में जनभागेदारी को भी शामिल करना होगा। जिस इलाके में बड़ी परियोजनाएं चल रही हों उससे सर्वाधिक प्रभावित स्थानीय निवासी ही होते हैं तो फिर इन परियोजनाओं के निर्माण व क्रियान्वयन में वहां की जनता को कैसे अलग रखा जा सकता है!

इन परियोजनाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायतों और प्रभावशाली समूहों को शामिल करना होगा। हर विभाग में व्याप्त अनावश्यक कानूनों व प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त करना होगा जिनकी आड़ में कुछ अधिकारियों को भ्रष्ट आचरण करने का मौका मिलता है। सरकारी विभागों में सतर्कता तंत्र विकसित कर उन्हें प्रभावशाली बनाना पड़ेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी पड़ेगी। स्थानीय या निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी का हथियार बनाना होगा।

वैसे तो बहुत से सरकारी कामकाज अब ‘आॅनलाइन’ होने लगे हैं पर इस क्रम को और आगे बढ़ाना होगा। कितने दुख की बात है कि आज भी किसानों को अपनी जमीन की फर्द, मकानों के कागजात लेने, लाइसेंस नवीनीकृत कराने, विभिन्न तरह के चालान भुगतने, बैंकों से ऋण लेने से लेकर राशन कार्ड बनवाने जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों की परिक्रमा करनी पड़ती है जहां उन्हें अनावश्यक दौड़ाया, भटकाया व काम को लटकाया जाता है ताकि वे विवश होकर सेवाशुल्क देने को तैयार हो सकें। लिहाजा, आम जनता से जुड़े कामों का जितना डिजटलीकरण होगा, निचले स्तर पर उतना ही भ्रष्टाचार कम होगा।

कहते हैं कि चोर के पांव नहीं होते, उसी तरह भ्रष्टाचार की जड़ें भी इतनी मजबूत नहीं जितनी कि दिखाई दे रही हैं। जरूरत है, ईमानदार प्रयास की। जब दुनिया के कई देश अपने यहां टेक्नोलॉजी के सहारे ईमानदार व्यवस्था स्थापित कर चुके हैं तो यह हमारे लिए भी कोई मुश्किल नहीं है। भ्रष्टाचार नजले की तरह है जो ऊपर से नीचे बहता है। सुखद यह है कि केंद्र सरकार ने ऊपर से सफाई अभियान चला दिया है और आशा की जानी चाहिए कि जल्द ही इसका असर पूरी व्यवस्था पर भी पड़ता दिखेगा।
’राकेश सैन, वीपीओ- लिदड़ां, जालंधर

 

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