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चौपाल: भ्रष्टाचार की जडें

ये आंकड़े 2005 से कम हैं। तब सालाना 20,500 करोड़ रुपए की घूस का लेन-देन होता था। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य भारत के राज्यों के मुकाबले दक्षिणी राज्यों में भ्रष्टाचार ज्यादा है।

Author July 22, 2019 1:43 AM
हजारों-लाखों के घोटाले अब करोड़ों और अरबों में तब्दील हो गए हैं।

किसी भी समाज में भ्रष्टाचार उस दीमक की तरह है जो भीतर ही भीतर खमोशी से उसकी जड़ों को खोखला कर देती है और अगर जड़ ही खोखली हो जाए तो समाज किसके सहारे खड़ा होगा। आज हमारे देश में भी ये दीमक लग चुकी है, देश की जड़ें खोखली हो चुकी हैं। पुलिस, प्रशासन, राजनीति सब जगह भ्रष्टाचारकी गहरे तक पैठा है। सरकारी विभागों में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने तक के लिए घूस देनी पड़ती है तो सार्वजनिक हित के लिए बनने वाली योजनाओं पर नेताओं और अधिकारियों की नजरें गढ़ी होती हैं। कभी हजारों-लाखों के घोटाले अब करोड़ों और अरबों में तब्दील हो गए हैं।

बोफर्स से शुरु हुई कहानी टू-जी स्पैक्ट्रम और राफेल सौदे तक पहुंच चुकी है। जनता की गाढ़ी कमाई का जो पैसा देश के विकास पर खर्च होना चाहिए, वह नेताओं और अधिकारियों के लॉकरों में पहुंच जाता है। दरअसल, भ्रष्टाचार को लेकर आज नजरिया बदल चुका है। हमने भ्रष्टाचार को अपने समाज और तंत्र का हिस्सा मान लिया है। बहुत से मामलों में गड़बड़ियों को हम यह कह कर टाल देते हैं कि इतना तो चलता ही है। हम अपनी सहूलियत के हिसाब से भ्रष्टााचार के मानक तय कर लेते हैं, अपने आराम के लिए इसे बढ़ावा भी देते हैं। बात जब बड़े स्तर की होती है तो बड़ी योजनाओं में शामिल लोग अपने स्तर पर यही करते हैं।

हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सालाना साढ़े छह हजार करोड़ रुपए रिश्वत का लेन-देन होता है। ये आंकड़े 2005 से कम हैं। तब सालाना 20,500 करोड़ रुपए की घूस का लेन-देन होता था। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य भारत के राज्यों के मुकाबले दक्षिणी राज्यों में भ्रष्टाचार ज्यादा है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से जारी किए गए ‘करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स’ में भारत की स्थिति और खराब हुई है। पिछले साल के मुकाबले भारत तीन पायदान और नीचे आ गया है। दुनिया के भ्रष्ट मुल्कों में भारत 79वें नंबर पर है। ऐसे में भारत कैसे खुशहाल देश और दुनिया की आर्थिक शक्ति बन पाएगा?
’सूर्यभानु बांधे, रायपुर (छत्तीसगढ़)

 

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