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चौपाल: हाशिए पर उक्रांद

उनका तर्क था कि वे विदेश जाकर उत्तराखंड के विकास के रास्तों का पता लगाएंगे। हंसी आती है उनके इस तर्क पर। कोई गरीब अमीरों के यहां जाकर शादी के तौर-तरीके सीखने का बहाना बनाए तो हंसी ही आएगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड आंदोलन से जुड़े लोग इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि पृथक राज्य निर्माण में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की प्रमुख भूमिका रही है। हालांकि इस जन आंदोलन से कोई ऐसा नेता उभरकर सामने नहीं आया जिस पर पूरे उत्तराखंड को भरोसा होता। छोटे से राज्य में तीन स्थानीय बोलियों को राजभाषा के पद पर आसीन कराने का सपना देखने वाले भूल गए कि गुजरात से ताल्लुक रखने वाले बापू ने भारत की राजभाषा के रूप में हिंदुस्तानी को वरीयता दी थी। कुछ लोग मानते हैं कि साधनों की कमी के कारण राष्ट्रीय दलों के सामने उक्रांद टिक नहीं पाया, यह सरासर गलत है। दरअसल, हम एक ऐसा नेता नहीं पा सके जिसके प्रति समाज के एक बड़े हिस्से की अगाध श्रद्धा हो। उक्रांद के जो गिने-चुने लोग शुरू में विधायक बने, वे सत्ता के लोभ से खुद को बचा नहीं पाए। पहाड़ का भ्रमण करने के बजाय हमारे नेता विदेश भ्रमण करने लगे। उनका तर्क था कि वे विदेश जाकर उत्तराखंड के विकास के रास्तों का पता लगाएंगे। हंसी आती है उनके इस तर्क पर। कोई गरीब अमीरों के यहां जाकर शादी के तौर-तरीके सीखने का बहाना बनाए तो हंसी ही आएगी।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, दिल्ली

पाकिस्तान से रिश्ते खत्म हों
नियंत्रण रेखा से व्यापार की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत थी, जिसे पिछली यूपीए सरकार ने जारी रखा। उसके बाद पिछले 59 महीने तक एनडीए सरकार ने भी इस व्यापार को जारी रखा, लेकिन अब जब कुछ ही हफ्तों में देश में नई सरकार आने वाली है तो गृह मंत्रालय की ओर से इस व्यापार को बंद करने का आदेश आ गया है। हालांकि यह आरोप सही है कि व्यापार के बहाने देश के भीतर अवैध मादक पदार्थ, नकली मुद्रा और घुसपैठियों का प्रवेश होता था, लेकिन इस फैसले को चुनाव के बीच में लिए जाने की क्या जरूरत थी? इससे पहले भी लिया जा सकता था क्योंकि इस मामले में खुफिया रिपोर्ट तो काफी समय से मिल रही होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर गलियारे पर काम चल रहा है, समझौता एक्सप्रेस चल रही है, कूटनीतिक संबंध भी बदस्तूर जारी हैं। इन सबके बीच सिर्फ व्यापार बंद कर देना और पाकिस्तान से सबसे पसंदीदा राष्टÑ का दर्जा वापस ले लेना, ये सब सिर्फ सांकेतिक बातें हैं। पाकिस्तान हमारा दुश्मन है तो उससे हर तरह का संबंध खत्म किया जाना चाहिए।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

बेरोजगारी पर हो बात
चुनाव के मौसम में लगभग सभी पार्टी के नेताओं की ओर से अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल रुकने का नाम नहीं ले रहा। कोई महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी कर रहा है तो कोई जाति-धर्म के नाम पर लोगों को बांट रहा है और हम चुपचाप देख रहे हैं। हमारी सोच इतनी सीमित हो गई है कि हम तर्क भी नहीं कर पा रहे हैं। हम उन्हीं नेताओं का चुनाव करते हैं जो हमारी मां-बहनों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। हम ऐसे ही नेता को अपना मसीहा मानते हैं जो किसी न किसी आपराधिक मामले में फंसा हो। आज जिस तरह देश में महंगाई व बेरोजगारी बढ़ रही है उस पर कोई बात नहीं कर रहा है। नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। तो आइए, हम सब मिलकर जाति-धर्म से ऊपर उठकर अपना वोट ऐसे प्रत्याशियों को दें जो हमारे हित की बात करें।
’सफी अंजुम, पटना

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