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चौपाल: जलवायु की फिक्र

जलवायु परिवर्तन जनित समस्याओं से अमेरिका अच्छी तरह वाकिफ है फिर भी इस समझौते के प्रति उसका उदासीन होना अफसोसनाक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही इस समझौते के कटु आलोचक रहे हैं और 2017 में उन्होंने इसे मानने से इंकार कर दिया था।

Author July 2, 2019 1:36 AM
अमेरिका, चीन के आयात पर कोई नया शुल्क नहीं लगाएगा।

जी-२० शिखर सम्मेलन में जलवायु संकट पर दो दिन तक चर्चा चली। अमेरिका अपने रुख पर कायम है और उसने पेरिस जलवायु समझौते से खुद को दूर रखा है। लेकिन बाकी उन्नीस सदस्य देशों ने बिना किसी बदलाव के इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन पर सहमति जताई है। पेरिस जलवायु समझौते में ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर दुनिया के देशों को गंभीरता से काम करना जरूरी है क्योंकि पर्यावरण समस्या की कोई राजनीतिक सीमाएं नहीं होती हैं। चीन सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करता है तो इसका नुकसान उसके पड़ोसी देशों को भी भुगतना पड़ता है लिहाजा, दुनिया के प्रत्येक देश को पेरिस समझौते का पालन करना चाहिए ताकि इस सृष्टि को बचाया जा सके। जब सभी देश हाथ बढ़ाएंगे तभी धरती की हालत सुधरेगी। अगर सबने पर्यावरण की रक्षा नहीं की तो यह धरती पर विनाश को न्योतना होगा।

जलवायु परिवर्तन जनित समस्याओं से अमेरिका अच्छी तरह वाकिफ है फिर भी इस समझौते के प्रति उसका उदासीन होना अफसोसनाक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही इस समझौते के कटु आलोचक रहे हैं और 2017 में उन्होंने इसे मानने से इंकार कर दिया था। चीन के बाद अमेरिका ऐसा दूसरा देश है जो सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करता है। उसके कई राज्य वायु प्रदूषण के शिकार हैं लेकिन फिर भी उसे अपने फायदे की पड़ी है। अमेरिका के इस रुख से दुनिया के देशों को गलत संदेश जाता है।

इस वजह से कई देश इस समझौते की शर्तें मानने से इंकार कर सकते हैं क्योंकि पेरिस में 196 देशों ने इस समझौते पर दस्तखत किए हैं। फिलहाल जी-२० में पेरिस समझौते के मामले में अमेरिका अलग-थलग पड़ गया है। जर्मनी, चीन, जापान समेत अन्य देश इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत पहले से ही पेरिस समझौते का समर्थक रहा है और प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंच पर पर्यावरण के प्रति संवेदना प्रकट करते रहे हैं। भारत को भी पेरिस समझौते के प्रावधानों को प्रतिबद्धता से लागू करना चाहिए क्योंकि हमारा देश भी कई पर्यावरणीय समस्याओं से ग्रस्त हैं। बहरहाल, दुनिया के शक्तिशाली देश जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता दिखा रहे हैं यह सराहनीय है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली, नागपुर

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