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चौपाल: साहसिक कदम

कश्मीरी अगर कश्मीरियत को भारतीय पहचान के ऊपर रखते हैं तो इन कदमों का कोई मतलब नहीं रह जाता। राष्ट्रीयता किसी में पैदा नहीं कराई जाती बल्कि ये तो स्वतस्फूर्त होती है।

Author August 12, 2019 4:52 AM
कश्मीर में शांति का माहौल फोटो सोर्स- @JmuKmrPolice

अनुच्छेद 370 को संशोधित कर केंद्र सरकार ने एक साहसिक कदम उठाया है जो वाकई सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। हालांकि इस प्रक्रिया की संवैधानिकता और वैधता पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। परंतु विपक्ष को यह भूलना नहीं चाहिए कि ऐसे संवेदननशील राष्ट्रीय मुद्दे का विरोध उनका ही घर जला देता है। कश्मीर का नागरिक अपने को भारतीय मानता है या नहीं, मुद्दा बस इतना ही है। कश्मीरी अगर कश्मीरियत को भारतीय पहचान के ऊपर रखते हैं तो इन कदमों का कोई मतलब नहीं रह जाता।

राष्ट्रीयता किसी में पैदा नहीं कराई जाती बल्कि ये तो स्वतस्फूर्त होती है। सरकार को चाहिए कि कश्मीरी लोगों से खुल कर संवाद करे और उनका भरोसा जीते। धीरे-धीरे ही सही, यदि सार्थक प्रयास किए जाएं तो अवश्य ही भारतीयता की भावना ही कश्मीर समस्या का अंतिम समाधान है। संवाद और नागरिक स्वंतत्रता तत्काल बहाल नहीं हुई तो विभाजनकारी शक्तियां क्षेत्रवाद के नाम पर पुन: हिंसा भड़काने में संकोच नहीं करेंगी।
’अनूप जैन, दिल्ली विवि

आदिवासियों का भला
आदिवासी समाज भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा है और इसी ने प्राचीन संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं को जीवित भी रखा है। ग्रामीण हाट बाजारों की रौनक इन्हीं से होती है। निमाड़ क्षेत्र के सारे व्यापार अधिकतर इसी समाज से जुड़े हुए हैं। आज बढ़ती आधुनिकता में इस समाज के लिए आवश्यकता है प्राचीन पंरपरा, संस्कृति और वेशभूषा के संरक्षण की। आदिवासियों की दशा सुधारने के दावे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन होता कुछ नहीं दिखता। वर्तमान में आदिवासी समाज का सबसे बड़ा शत्रु शराब है, जिसके कारण असमय ही लाखों परिवार दरिद्रता के गाल में समा जाते हैं, अधिकतर नौजवान युवा नशे की वजह से ही सड़क हादसों शिकार हुए है। आवश्यक है पारंपरिक ताड़ी को उपयोग में लाकर शराब पर प्रतिबंध लगाया जाए।
’मंगलेश सोनी, मनावर (धार)

साइबर ठगी का जाल
इस साइबर युग में चाहे लोगों को सौ से ज्यादा फायदे होंगे लेकिन साथ ही साइबर ठगी के संकट से भी जूझना पड़ रहा है। इंटरनेट पूरी तरह से सुरक्षित है और ये हमारी जानकारी किसी को नही देता, यह कहना अब पूरी तरह से झूठ साबित हो गया है। अगर ऐसा है तो कैसे लोगों के साथ इंटरनेट के माध्यम से ठगी और जालसाजी हो रही है। पंजाब में छह महीने में साइबर ठगी के पांच सौ से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। आपको भले ही पेटीएम या क्रेडिट कार्ड से लेनदेन करना आसान लगता होगा, पर यह दिनोंदिन खतरनाक साबित हो रहा है। हाल में पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी के साथ साइबर ठगों ने तेईस लाख की ठगी कर ली। हालांकि यह मामला हाई प्रोफाईल था तो पुलिस जल्द हरकत में आ गई। लेकिन आन आदमी की शिकायत पर इतनी जल्दी कार्रवाई नहीं होती। बहुत बार देखा गया है कि पुलिस बड़े लोगों के मामले जल्दी ही निपटा देती है परंतु हम आम लोगों को अपने ही पैसों के लिए पुलिस के पास न जाने कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं।
’जानवी बिट्ठल, जलंधर

 

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