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चौपाल: बेहतरी के स्कूल व डिजिटल मुश्किल

आज अन्य राज्य सरकारों से भी यह उम्मीद है कि वे प्रेरणा लेकर सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने की कोशिश करे।

Author Published on: January 15, 2020 2:45 AM
निजी स्कूलों के सामने सरकारी स्कूल सिमट रहे हैं।

आज सरकारी स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। निजी स्कूलों के सामने सरकारी स्कूल सिमट रहे हैं। कहीं बिजली नहीं तो कहीं पीने का पानी, तो कहीं बैठने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। ज्यादातर स्कूलों में यही हाल है और यही वजह है कि आज इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने नहीं आते और निजी स्कूलों की पौ-बारह हो रही है। लेकिन दिल्ली के स्कूलों ने यह दिखा दिया है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। एजूकेशन वर्ल्ड इंडिया की ताजा रैकिंग में दिल्ली के तीन सरकारी स्कूलों ने ‘टॉप-10’ में जगह बनाई है। निश्चित ही दिल्ली सरकार की मेहनत का ही परिणाम है। आज अन्य राज्य सरकारों से भी यह उम्मीद है कि वे प्रेरणा लेकर सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने की कोशिश करे। तभी बच पाएंगे ये सरकारी स्कूल।

’साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर

डिजिटल मुश्किल

देश डिजिटल लेन-देन की ओर बढ़ रहा है। सरकार, रिजर्व बैंक, अन्य सभी सरकारी-प्राइवेट बैंक और लगभग सभी फाइनेंस दायरे डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूज आम लोगों को डिजिटल लेन-देन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कभी आॅनलाइन कोई बिल अदा करते हुए ट्राजेंक्शन फेल हो जाता है या पैसे ट्रांसफर करते हुए कोई खामी आ जाने के कारण ट्रांजेंक्शन नहीं होती, लेकिन बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं। जब इसकी कोई शिकायत संबंधित विभाग या बैंक से की जाती है तो वे 48 से 72 घंटे का समय इस समस्या का हल होने की बात कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

इस कारण उन लोगों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है, जिन्होंने अपने किसी बिल की अदायगी बिल की अंतिम तिथी को आॅनलाइन की या फिर किसी बहुत जरूरी काम, जैसे दवा आदि लेने के लिए अपने किसी रिश्तेदार को ऑनलाइन पैसा भेजने की कोशिश की, लेकिन उसकी ट्रांजेंक्शन फेल हो गई। रिजर्व बैंक को आॅनलाइन लेनदेन फेल होने वाली प्रक्रिया में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए और बैंकों को इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश देने चाहिए।
रिजर्व बैंक ने बैंकों से परेशान लोगों के लिए अपनी बेवसाइट पर बैंकों की शिकायत करने की सुविधा भी दी है, लेकिन उसमें भी समस्या के समाधान के लिए एक लंबी प्रक्रिया है। यानी वहां भी शिकायत, बैंक में की गई शिकायत के तीस दिन बाद करने का ही प्रावधान है। रिजर्ब बैंक को चाहिए की बैंकों से परेशान लोगों को कोई ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जो सुलभ और जल्दी से जल्दी समस्या का हल निकालने वाला हो।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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