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चौपाल: सही वक्त

जिसे हम सही नहीं कह सकते वह भी कहीं न कहीं सही ही होता है। यह समय इसलिए सही है कि सही पार्टी सत्ता में आई है। पहले जो सरकार थी वह भी सही थी, लेकिन वह अपने समय पर सही थी। चूंकि सरकारें हमेशा सही होती हैं इसलिए विपक्ष भी सही होता है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

कुछ लोग सही कहते हैं कि सबसे सही समय वह होता है जब बिलकुल सही नतीजे आते हैं। हालांकि वे भी सही हैं जो कहते हैं कि यह सही वक्त नहीं है और नतीजे भी सही नहीं आ रहे हैं। तात्पर्य यह कि अपने यहां ऐसा कुछ नहीं होता जो सही नहीं कहा जा सके। जिसे हम सही नहीं कह सकते वह भी कहीं न कहीं सही ही होता है। यह समय इसलिए सही है कि सही पार्टी सत्ता में आई है। पहले जो सरकार थी वह भी सही थी, लेकिन वह अपने समय पर सही थी। चूंकि सरकारें हमेशा सही होती हैं इसलिए विपक्ष भी सही होता है। सरकारों के निर्णयों का विरोध करके वह बिलकुल सही काम करता है। सही तरह से यदि विपक्ष अपना दायित्व नहीं निभाएगा तो सरकार को कैसे सही किया जा सकता है! सरकार को सही रखने के लिए विरोधियों को भी सही कार्य करते रहना पड़ता है। सही फैसलों का विरोध भी विपक्ष के नाते सही है और जो सही नहीं हो रहा है उसे सही किए जाने के लिए आवाज उठाना भी बिलकुल सही होता है।

कहते हैं कि पिछली सरकार के वक्त बहुत घोटाले हुए, भ्रष्टाचार हुआ। सही हुआ कि यह सब पहले हो गया। जागरूकता आई और अब ध्यान रखा जा सकता है कि ऐसा दोबारा न हो। यह एक सही सावधानी है। कभी सार्वजनिक क्षेत्र और राष्ट्रीयकरण को सही माना गया तो अब निजी हाथों में विकास की कुदाल थमाए जाने की पहल दिखाई देती है। यह भी सही है। जब सरकारी मशीनरी सही नहीं रहे तो निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाना भी सही कदम है।

वह भी सही था जब लोग आपस में मिला-जुला करते थे, सामाजिक रूप से एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते थे। घर में चीनी खत्म हो जाती तो पड़ोसी से मांग लेते थे, कोई बीमार पड़ता तो चचेरा भाई अस्पताल लिए जाता था। हर काम के लिए चल कर जाते थे तो काम के साथ व्यायाम भी हो जाता था। अब भी सही ही है कि सब कुछ आॅनलाइन हो जाता है। चीनी की बात तो दूर, पड़ोसी का मुंह तक नहीं देखना पड़ता। एक फोन करते ही दुनिया भर का किराना और सामान घर पर हाजिर। डिजिटल इंडिया की दिशा भी सही है। मोबाइल के बटन दबाते ही तमाम समस्याओं का समाधान संभव! मनुष्य के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना सदियों से हमारा दर्शन रहा है। किसी ने कहा भी है- ‘जो हो रहा है वह सही हो रहा है और जो सही नहीं हो रहा समझो वह और ज्यादा सही हो रहा है।’

भले ही आप मुझे बेहद लचर या गोबर व्यक्ति कहें, सच तो यह है कि अब ‘गलत’ कहना बहुत कठिन और जोखिम भरा काम है। इसे बोलने से दुख-संताप बढ़ता है, सुख और आनंद में कमी आती है। एक बैल हमारी ओर सींग लहराता आता दिखाई देने लगता है जो बाद में एक भीड़ में बदल जाता है। यही कारण है कि मैंने अब ‘गलत’ कहना छोड़ दिया है!
ब्रजेश कानूनगो, चमेली पार्क, इंदौर

रोजगार की खातिर
केंद्र सरकार आएदिन रोजगार वृद्धि की बात करती है तो आखिर ये रोजगार जा कहां रहे हैं? 2017 में बेरोजगारी दर 3.4 फीसद थी। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में यह 3.5 प्रतिशत हो गई है और 2020 तक इसके 3.6 फीसद होने का अनुमान है। इसके अलावा 77 फीसद लोग ‘छिपी बेरोजगारी’ की चपेट में हैं। बेरोजगारी का मुख्य कारण रोजगार सृजन में कमी, जनसंख्या वृद्धि, अकुशल लोगों का जमावड़ा, शिक्षा के स्तर में गिरावट आदि हैं। यह किसी भी देश के विकास में अवरोधक है जिस पर चिंतन करने की आवश्यकता है। इस समस्या से निजात पाने का आसान तरीका है -उद्यमिता। उद्यमिता को बढ़ावा देकर हम निरंतर आसमान छूती बेरोजगारी को कम करने की पहल कर सकते हैं। रोजगार सृजन, शिक्षा में गुणवत्ता लाकर और जनसंख्या विस्फोट पर काबू पाकर भी बेरोजगारी पर अंकुश लगा सकते हैं।
नेहा कुमारी, नई दिल्ली

अभी नहीं
संघ परिवार की आम और विश्व हिंदू परिषद की खास बेचैनी पर गौर करेंगे तो लगेगा कि राम मंदिर निर्माण की मुहिम अंतिम दौर में है। भाजपा नेताओं का रवैया देखेंगे तो लगेगा कि वे मामले को और पक जाने देना चाहते हैं। विश्व हिंदू परिषद और साधु समाज को आगामी चुनाव के मद्देनजर भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हुए देखा जा सकता है। उधर पूरा विपक्ष इस बार लगभग तमाशबीन बना हुआ है। वह पिछली बार की तरह धर्मनिरपेक्षता का झंडाबरदार या मुसलमानों का दिखावटी रक्षक बनने की कोशिश भी नहीं कर रहा है।

यह कभी साफ नहीं हुआ कि अयोध्या मेंं एक महीने में दो बार जुटे संतों और राम मंदिर चाहने वालों के बीच प्रधानमंत्री के उस भाषण पर क्या प्रतिक्रिया हुई जिसमें उन्होंने मंदिर निर्माण में देरी के लिए कांग्रेस को दोषी करार दिया था। जिस दिन अयोध्या में 50 हजार से ज्यादा साधु-संत, विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के कार्यकर्ता जुटे थे उसी दिन प्रधानमंत्री अजमेर में भाजपा की चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मंदिर निर्माण को टालना चाहती है और वह सुप्रीम कोर्ट के जजों को डरा कर फैसला नहीं आने देना चाहती। प्रधानमंत्री ऐसा बयान देते हैं तो यही लगता है कि फिलहाल मंदिर मसले पर कुछ होने वाला नहीं है। इसके अलावा राजनीतिक रैलियों में पिछले दिनों राहुल गांधी हिंदुत्व के बारे में जनता का ज्ञानवर्धन कर रहे थे। चुनाव के प्रचार के दौरान दिए गए बयान मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाले होते हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को ही हर मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ने को बेताब देखा जा सकता है।
अमन सिंह, बरेली कॉलेज, बरेली

यमुना में अमोनिया
यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाने के कारण दिल्ली में अकसर पीने के पानी की कमी हो जाती है। अमोनिया की अधिकता से दिल्ली में लगे जल शोधन संयंत्रों में भी पानी साफ नहीं हो पाता जिससे पानी की किल्लत बढ़ जाती है। अमोनिया की मात्रा बढ़ने की वजह एक दीवार है, जिसे ड्रेन नंबर छह और आठ पर बनाया जाना है, जो काफी समय से टूटी हुई है। यह दीवार न बनने से गंदा पानी साफ पानी में मिल कर उसे भी दूषित कर देता है। विडंबना है कि इस दीवार का निर्माण हरियाणा को करना है जिसे दिल्ली जल बोर्ड आर्थिक सहायता देगा। लेकिन हरियाणा के पास दिल्ली जल बोर्ड के अठ्ठाईस करोड़ रुपए बकाया होने के कारण इस दीवार का निर्माण अभी तक शुरू नहीं किया गया है। सवाल है कि दोनों सरकारें आखिर कब इस समस्या से निपटने का टिकाऊ उपाय करेंगी?
विशेक, दिल्ली विश्वविद्यालय

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