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चौपाल: फिर हैवानियत

ऐसी विकृत मानसिकता वाले हत्यारों को न्यायालय द्वारा जल्दी से जल्दी मिसाल बनने वाली सजा देनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसा अपराध करने की किसी की हिम्मत न हो।

Author June 8, 2019 1:41 AM
अलीगढ़ के टप्पल थाना क्षेत्र के बाहर स्थानीय लोग। फोटो: अवनीश कुमार

अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची के साथ हैवानियत की खबर सामने आई है। उसकी नृशंस हत्या करके शव कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया था। मामला बच्ची के पिता और आरोपी के बीच महज दस हजार रुपए के लेन-देन का था लेकिन आरोपी ने अपना गुस्सा मासूम बच्ची पर निकाला। ऐसी विकृत मानसिकता वाले हत्यारों को न्यायालय द्वारा जल्दी से जल्दी मिसाल बनने वाली सजा देनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसा अपराध करने की किसी की हिम्मत न हो।
’बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद

अलग रास्ते
जीत के सौ अभिभावक होते हैं लेकिन पराजय हमेशा लावारिस होती है। उसका आगे-पीछे कोई नहीं होता। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमने देखा कैसे गठबंधन बना। आशातीत सफलता नहीं मिली तो यह गठबंधन ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा। कल तक सपा, बसपा और आरएलडी साथ जीने-मरने की कसमें खा रहे थे पर अब तीनों ने अगला उपचुनाव अलग-अलग लड़ने का ऐलान कर दिया है। मायावती, जो कभी उपचुनाव नहीं लड़ती थीं, अब किन कारणों से इसमें दिलचस्पी दिखा रही हैं? मायावती का सपा पर आरोप पूर्ण सत्य नहीं है।

यह बात ठीक है कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में आपसी फूट हो गई और दल ने ठीक से प्रदेश में प्रचार भी नहीं किया। मगर सपा का वोट बसपा को हस्तांतरित नहीं हुआ यह कहना ज्यादती होगी क्योंकि मायावती शून्य पर थीं और अब दस पर पहुंच गई हैं। दरअसल, गठबंधन के नेताओं को अति आत्मविश्वास हो गया था इसलिए अखिलेश यादव और मायावती दोनों उत्तर प्रदेश छोड़ कर अन्य प्रदेशों में प्रचार कर रहे थे। अब कार्यालय और घर में बैठकर चुनाव जीतना नामुमकिन है। नेताओं को 365 दिन जनता से जुड़ना होगा। उसके मुद्दे उठाने होंगे वरना वही हश्र होगा जो आज विपक्ष का हुआ है।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

स्वार्थ के सगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को व्यापारिक वरीयता सूची यानी जीएसपी से बाहर करने से साफ हो गया है कि वे भारत से दोस्ती के अलावा कुछ और भी चाहते हैं। जीएसपी यानी जनरलाइज्ड सिस्टम आॅफ प्रिफरेंसेजेस की सुविधा अमेरिका कुछ मुल्कों को देता है जिसके तहत उनके उत्पादों को अमेरिका में बिना शुल्क आयात की अनुमति है। भारत, जिससे मात्र 21.3 अरब डॉलर का घाटा है, उससे यह सुविधा वापस लेना और चीन से 566 अरब डॉलर का घाटा होने पर भी यह सुविधा बरकरार रखना ट्रंप के भारत के साथ संबंधों की हकीकत की ओर इशारा कर रहा है ।
’उर्विजा पांडेय, रीवा, मध्यप्रदेश

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