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चौपाल: खतरे की घंटी व जायज विरोध

जेएनयू में पिछले कई दिनों से छात्र फीस बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं।

Author Published on: November 23, 2019 3:29 AM
बिगड़ते पर्यावरण से बाढ़, सूखा, जंगलों में आग, बेमौसम बारिश, ऋतु चक्र में परिवर्तन और अकाल जैसी आपदाएं बढ़ती जा रही हैं।

आज दुनिया में जिस तेजी से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है और वैश्विक तापमान में वृद्धि धरती के लिए बड़ा संकट बन चुकी है, उससे संपूर्ण प्राणी जगत के अस्तत्वि के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। इस संकट के लिए कारकानों से निकलने वाली कॉर्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसें ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए उत्तरदायी हैं। बिगड़ते पर्यावरण से बाढ़, सूखा, जंगलों में आग, बेमौसम बारिश, ऋतु चक्र में परिवर्तन और अकाल जैसी आपदाएं बढ़ती जा रही हैं।

ग्लेशियर लगातार पिघलते जा रहे हैं, समुद्रों का बढ़ता जल स्तर भी खतरे का सूचक हैं। इन सबका असर यह हुआ है कि धरती पर इंसान को कई नई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मानव जाति पर ही नहीं, बल्कि वन्य जीवों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। अब भी अगर हम जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर सचेत नहीं हुए तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

’श्रीनिवास पंवार बिश्नोई, दिल्ली विवि

जायज विरोध

जेएनयू में पिछले कई दिनों से छात्र फीस बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध किसी इशारे पर नहीं हो रहा है, बल्कि इससे सीधे-सीधे छात्रों की समस्या जुड़ी है। शिक्षा सबके लिए जरूरी है, चाहे वह आम हो या खास। शिक्षा तो सभी को सस्ती मिलनी चाहिए, ताकि आम, गरीब, मजदूर, किसान और हर तबके के बच्चे को पढ़ाई का उचित अवसर मिल सके और पैसे के अभाव में वह शिक्षा से वंचित न हो। वैसे भी सभी को शिक्षा मुहैया कराना राज्य की जिम्मेदारी है।

एक तरफ देश के समस्त जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों, मंत्रियों को कई प्रकार की सुख सुविधाएं दी जाती हैं, फटाफट इनके वेतन बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन शिक्षा के मद में इतनी बढ़ोतरी नहीं की जाती कि छात्रों की फीस को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सके। सवाल है कि जब जनप्रतिनिधियों को खजाने से भारी भरकम वेतन मिलता है तो फिर उन्हें चार हजार यूनिट बिजली मुफ्त, कैंटीन के खाने पर सब्सिडी, टेलीफोन सुविधा या अन्य कई प्रकार के भत्ते क्यों दिए जाते हैं? शिक्षा को अति कम शुल्क या शुल्क मुक्त रखा जाना जरूरी है। महात्मा गांधी तो चाहते थे कि चाहे आम हो या खास, सभी को शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय की सुविधा मुफ्त में मिले।

’हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन

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