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चौपाल: चांद के पार

आज चंद्रयान-2 मिशन में ज्यादातर स्वदेशी तकनीक का ही इस्तेमाल हुआ है। इससे हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है। चंद्रयान-2 का लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जहां आज तक कोई नहीं पहुंचा है।

Author July 24, 2019 1:21 AM
भारत ने सोमवार को चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण को अंजाम देकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगा दी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चांद के पार जाने की कल्पना को सच सच कर दिखाया। सोमवार को इसरो ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया जब जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट के जरिए चंद्रयान-2 ने श्री हरिकोटा से उड़न भरी और चंद्रयान को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया। तमाम तरह की बाधाओं को तोड़ते हुए हर बार कामयाबी की नई कहानी लिखना इसरो की पुरानी फितरत रही है। इस रॉकेट में वही क्रायोजेनिक इंजन इस्तेमाल हुआ है जिसकी तकनीक भारत को देने पर अमेरिका ने कई साल पहले पाबंदी लगा दी थी। इतना ही नहीं जूसरे देशों को भी उसने भारत को यह तकनीक देने से रोक दिया था। लेकिन भारत ने अपना क्रायोजनिक इंजन खुद विकसित कर लिया और अब इस इंजन की तीसरी पीढ़ी के रॉकेट को तैयार कर उसके प्रक्षेपण में भी सफलता हासिल कर ली है। आज चंद्रयान-2 मिशन में ज्यादातर स्वदेशी तकनीक का ही इस्तेमाल हुआ है। इससे हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है। चंद्रयान-2 का लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जहां आज तक कोई नहीं पहुंचा है और इस हिस्से को धरती से भी नहीं देखा जा सकता। इसरो का यह प्रयास बताता है कि अंतरिक्ष की दुनिया में अभी और झंडे गाढ़े जाने हैं। चंद्र मिशन के लिए हमारे वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं।

संस्कृति चौधरी, सहरसा, बिहार

सूचनाओं पर लगाम

सरकार ने जिस आनन-फानन में लोकसभा में बिना उचित बहस किए आरटीआइ संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी, वह काफी चिंताजनक है। सूचना का अधिकार देने वाले इस कानून से जनप्रतिनिधियों की दुश्मनी कोई नई नहीं है। इस बिल के पास होने के छह महीने के भीतर ही इसमें संशोधन करने की कोशिश की गई थी, किंतु भारी विरोध के कारण इसे टाल दिया गया था। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने किसी की नहीं सुनने की ठान ली है। संशोधन के अनुसार मूल विधेयक के 13,16 और 27 धाराओं में बदलाव किए जाएंगे, जिसके बाद केंद्र और राज्य स्तरीय सूचना आयोग चुनाव आयोग की जगह अब केंद्र सरकार के अधीन काम करेगा। अब सूचना आयोग में काम करने वालों के वेतन और अवधि का ख्याल भी सरकार रखेगी। और तो और इस आयोग में भर्ती भी सरकार ही करेगी। इन संशोधनों ने कहीं न कहीं सूचना के अधिकार बिल को अपंग कर दिया है जिसके बाद लोग अपने प्रतिनिधियों के बारे में भी खुल कर नहीं जान पाएंगे।
आदित्य झा, सीतामढ़ी, बिहार

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