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चौपाल: एक बार फिर, कुछ सुधार और व संभलने की जरूरत

परिवारवाद के आरोपों के बीच लोकतंत्र की लाज रखते हुए किसी युवा नेता को यह कमान दी जानी चाहिए थी, पर लगता है परिवार का ठप्पा अभी कुछ वर्ष और चलने वाला है।

Author नई दिल्ली | August 15, 2019 4:14 AM
सांकेतिक तस्वीर।

एक बार फिर

सोनिया गांधी एक बार फिर कांग्रेस की डूबती नैया पार कराने के लिए मैदान में हैं। वैसे सोनियाजी के लगातार उन्नीस साल पार्टी अध्यक्ष रहने के बाद 2017 में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था, पर उनके अकुशल नेतृत्व, रॉफेल पर फ्लॉप शोर और लोकसभा चुनाव में करारी हार से निराश होकर महज डेढ़ साल में ही उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। परिवारवाद के आरोपों के बीच लोकतंत्र की लाज रखते हुए किसी युवा नेता को यह कमान दी जानी चाहिए थी, पर लगता है परिवार का ठप्पा अभी कुछ वर्ष और चलने वाला है। अन्य ‘सरनेम’ वालों को अभी कुछ साल और इंतजार करना होगा। जो भी हो, एक कमजोर विपक्ष के कारण जनता का ही नुकसान हो रहा है। कुछ गैर जरूरी मुद्दों पर विपक्ष ने सदन में हल्ला मचा कर पहले ही अपनी किरकिरी करवा ली है, अब देखते हैं आगे क्या होता है!
’मंगलेश सोनी, मनावर, जिला धार

कुछ सुधार और

मौजूदा चिकित्सा प्रणाली में व्याप्त डॉक्टरों का प्रभुत्व, तंत्र में अपारदर्शिता, सेवाओं की जटिलता, महंगा इलाज आदि समस्याओं से मरीजों का अहित हो रहा था। ऐसी स्थिति में नए चिकित्सा कानून द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामान्य चिकित्सा क्षेत्र की समझ रखने वालों और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आर्थिक विश्लेषकों को भी अवसर मिलेगा। नए कॉलेजों की स्थापना के लिए बार-बार निरीक्षण से पैदा हुए इंस्पेक्टर राज को भी नए अधिनियम द्वारा समाप्त किया गया है।

स्वास्थ्य संबंधी मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं का आकलन तथा राज्य चिकित्सा आयोग द्वारा विधेयक के विभिन्न प्रावधानों को लागू करना नए चिकित्सा कानून के दायित्वों में प्रमुख हैं। इनमें से एक है सभी लाइसेंस प्राप्त चिकित्सकों के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर बनाना, जिससे पेशेवर डॉक्टरों के आचरण का विनियमन किया जा सके और उनके पेशेवर अथवा कदाचार के खिलाफ शिकायत की जा सके। इस प्रकार मरीजों के हितों की सुरक्षा और चिकित्सीय सेवाओं के वाणिज्यीकरण के नकारात्मक प्रभाव को भी रोका जा सकेगा।

नए अधिनियम के अंतर्गत आधुनिक चिकित्सा पेशे से जुड़े कुछ मध्यम स्तर के चिकित्सकों को सीमित लाइसेंस दिया जा सकता है। इससे मध्यम स्तर के चिकित्सक कुछ मामलों में प्राथमिक और निवारक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित सेवाएं दे सकते हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम -2019, चिकित्सा शिक्षा और तंत्र को सुधारने पर ध्यान देगा लेकिन सरकार को इससे भी कुछ और बड़े मुद्दों जैसे प्रतिजैविक प्रतिरोधकता और सरकारी खर्च में कमी आदि पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

’सुशील कुमार, मदनेपुर, जालौन

संभलने की जरूरत
मनुष्य तो अपनी आजादी की लड़ाई लड़ सकता है, लेकिन मूक प्राणी, जीव-जंतु, पौधे, वृक्ष, नदियां आदि नहीं। प्रकृति और मनुष्य हमेशा से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। मनुष्य ने सदियों से अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण का दोहन ही किया है और इसके संतुलन को बिगाड़ दिया है। परिणामस्वरूप आज वैश्विक तापमान वृद्धि, वर्षा में अनियमितता, बिगड़ती पारिस्थितिकी, जैव विविधता का ह्रास और असंतुलित ऋतुचक्र आदि देखने को मिल रहे हैं। अभी भी समय है संभलने का। पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए हम वृक्ष लगाएं और उनकी रक्षा के लिए रक्षाबंधन को वृक्षाबंधन के रूप में मनाएं।

’अभिप्रिंस घुवारा, टीकमगढ़, मध्यप्रदेश

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