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चौपाल: ऐसी बेचारगी और उपेक्षा का खेल

हॉकी की तरह ही अन्य खेलों की भी उपेक्षा हो रही है।

Author August 13, 2019 4:05 AM
सांकेतिक तस्वीर।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद जिस तरह से पार्टी ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना क्या उससे यह नहीं समझा जाना चाहिए कि वह आगे बढ़ने के लिए दो कदम पीछे चली गई है! 134 साल पुरानी पार्टी में ऐसा बेचारगी का आलम कभी नहीं था। जब यह अपने घर के अंदर बिखरा पड़ा सामान ही सहेज नहीं पाई है तो ऐसे में तूफान का रूप धारण कर चुके भाजपा के राष्ट्रवाद से कैसे मुकाबला करेगी?

हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र का चुनाव दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। सोनिया गांधी अभी दो साल पहले ही अध्यक्ष पद से हटी थीं। कहने को उन्हें अंतरिम अध्यक्ष कहा जा रहा है मगर यह पद स्थायी भी हो सकता है। विडंबना है कि 1984 में जिस दल ने 414 लोकसभा सीटें जीती थीं आज वह इतना बिखर गया है कि उसके सदस्य सदन में और उसके बाहर पार्टी पर लगने वाले आरोपों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। लगता है,अब युवा पीढ़ी यह मान चुकी है कि देश में जो भी गलत हुआ वह कांग्रेस के कारण हुआ और जो भी अच्छा हो रहा है वह 2014 के बाद हो रहा है। इससे देश अब न सिर्फ कांग्रेस मुक्त बल्कि विपक्ष मुक्त होने की तरफ भी तेजी से बढ़ रहा है।

’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

उपेक्षा का खेल
भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है लेकिन लोगों को शायद ही पता होगा कि अपनी हॉकी टीम का कप्तान कौन है! हॉकी का विश्व कप भारत जीता या हारा इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इस बार भारत क्रिकेट विश्व कप हारा तो हर तरफ निराशा का माहौल था। हॉकी की तरह ही अन्य खेलों की भी उपेक्षा हो रही है। जहां एक तरफ क्रिकेटर करोड़ों कमा रहे हैं तो दूसरी तरफ अन्य खेलों के खिलाड़ी अपना घर भी मुश्किल से चला रहे हैं। वे सब देश के लिए स्वर्ण पदक लाकर भी पीतल के भाव हो जाते हैं। क्रिकेट कप हाथ से गया, इसका तो सबको बहुत सदमा लगा पर हिमा दास ने भारत को पांच स्वर्ण पदक दिलाए उस पर खुशी की कोई लहर नहीं!

आखिर भारत सरकार अन्य खेलों को प्रोत्साहित क्यों नहीं कर रही है? क्यों इनके खिलाड़ियों की हालत इतनी खराब है कि वे अपना गुजारा भी बड़ी मुश्किल से कर रहे हैं। देश के लिए जीत कर भी वे खुद क्यों हार रहे हैं? सरकार को अन्य खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े स्तर पर खेल स्पर्धाएं आयोजित करनी चाहिए। मीडिया को अन्य खेलों के बारे में भी लोगों को अवगत कराना चाहिए। अन्य खेलों के खिलाड़ियों को अच्छी नौकरियों के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था करनी होगी। मीडिया का इसमें बड़ा योगदान हो सकता है। वह मैच जीतने पर केवल क्रिकेट खिलाड़ियों के इंटरव्यू न ले बल्कि हिमा दास जैसे देश को गौरवान्वित करने वालों को भी आगे लाए।
’राघव जैन, जालंधर

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