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चौपाल: समता का सपना, शोहदों का आतंक और अच्छा कदम

हमारे समाज में कुछ लोगों को अनेक विशेषाधिकार प्राप्त है मगर कुछ लोग बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: August 16, 2019 4:11 AM
सांकेतिक तस्वीर।

समता का सपना

भारत को स्वतंत्र हुए 72 वर्ष हो गए हैं, लेकिन इतने वर्षों बाद भी स्वतंत्रता और समानता से जुड़े प्रश्नों का उठना बंद नहीं हुआ है। राजनीतिक क्षेत्र में समानता तो समान अधिकारों के रूप में निर्धारित की गई है लेकिन यह आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में निर्धारित नहीं है। लोगों के पास समान राजनीतिक अधिकार तो हैं पर किसी न किसी वजह से समाज में उनके साथ अभी भी भेदभाव हो रहा है। हमारे समाज में कुछ लोगों को अनेक विशेषाधिकार प्राप्त है मगर कुछ लोग बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस रहे हैं। इन लोगों के लिए स्वतंत्रता अभी भी दूर है। आखिर ऐसी स्वतंत्रता का क्या फायदा जिसमें नागरिक अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं के लिए भी तरस रहा हो!

’चांद मोहम्मद, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

शोहदों का आतंक

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर हर जिले के प्रमुख विद्यालयों और महिला कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने, भद्दी फब्तियां कसने और अश्लील इशारे करने वाले शोहदे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

इनका आतंक इस कदर हावी है कि अनेक लोगों ने अपनी बहन-बेटियों का विद्यालय जाना ही बंद करा दिया है। उनका कहना है कि हम इतने सक्षम नहीं कि इन शोहदों से लड़ सकें। ये राह चलती लड़कियों का हाथ पकड़ कर अश्लील हरकतें करने से भी बाज नहीं आते हैं। सरकार से गुजारिश है कि बालिकाओं की सुरक्षा के लिए स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान, फूड प्लाजा आदि जगहों पर सादी वर्दी में पुलिस बल की तैनाती कराए।

’योगेंद्र गौतम, ललऊ खेड़ा बाजार, उन्नाव

अच्छा कदम

उत्तर प्रदेश में सड़क पर किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन करने पर पाबंदी लगा दी गई है। यह सरकार का अत्यंत प्रशंसनीय कदम है। अभी तक एक वर्ग अक्सर सड़क पर नमाज पढ़ता था जिससे सड़कों पर जाम लग जाता था और आने-जाने वालों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। इसके जवाब में दूसरे वर्ग ने सड़कों पर हनुमान चालीसा का पाठ करना प्रारंभ कर दिया।

इसकी वजह से कुछ दिन पहले अलीगढ़ में भयंकर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इन तमाम बातों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि अब से सड़क पर कोई धार्मिक आयोजन नहीं होगा। यह फैसला समाज और जनता के हित में लिया गया है। हम सबको इसका स्वागत करना चाहिए।

’बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद

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