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चौपाल: मुश्किल राह, महंगी परीक्षा और गलतियों से सीख

जनार्दन द्विवेदी, कर्ण सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा आदि के विचार गुलाम नबी आजाद से अनुच्छेद 370 पर सर्वथा भिन्न नजर आए हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: August 14, 2019 3:16 AM
सांकेतिक तस्वीर।

अब केवल चार राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बची हैं। ऐसे में सोनिया गांधी हताश व निराश कांग्रेस का सहारा कैसे बन पाएंगी? तब कांग्रेस एकजुट थी, अब वह बात नहीं रही। जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35-ए हटाए जाने के बाद जिस तरह कांग्रेस दो खेमों में बंटी नजर आई, उसका मतलब साफ है कि इस बार सोनिया गांधी की राह बहुत आसान नहीं है। जनार्दन द्विवेदी, कर्ण सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा आदि के विचार गुलाम नबी आजाद से अनुच्छेद 370 पर सर्वथा भिन्न नजर आए हैं।

दरअसल, कांग्रेस में बदलाव तभी संभव है जब उसमें सब कुछ बदल दिया जाए। कांग्रेस को नरेंद्र मोदी से बड़ी विकास की रेखा खींचनी होगी। विपक्ष में रह कर भी वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए सरकार पर दबाव बना सकती है। काम करने का श्रेय अगर वह नहीं ले सकती है तो कांग्रेस काम करने के लिए अपेक्षित दबाव बनाने का श्रेय तो ले ही सकती है।

’रितेश कुमार उपाध्याय, संत कबीर नगर

महंगी परीक्षा

भारत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की स्थापना 1952 में हुई थी। इसके अनेक उद्देश्यों में से एक सभी बच्चों को कम शुल्क में अच्छी और तनावरहित शिक्षा प्रदान करना है। दिल्ली के सभी सरकारी स्कूल सीबीएसई के अंतर्गत आते हैं और उनकी स्थापना इसीलिए की गई थी कि गरीब अभिभावक भी अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए उनमें भेज सकें। लेकिन आज सीबीएसई की स्थापना के ये सारे लक्ष्य धूमिल लगते हैं क्योंकि उसने हाल ही में दसवीं और बारहवीं कक्षा का परीक्षा शुल्क प्रत्येक विषय 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है।

पहले विद्यार्थियों के कुल विषयों का परीक्षा व्यय 750 रुपए था, लेकिन अब उन्हें इस मद में 1500 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। गरीब और अल्प आय वाले अभिभावकों को पहले ही शुल्क अदा करने में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था लेकिन उसे कम करने की बजाय अब उन पर और बोझ लाद दिया गया है। क्या सरकार को उनकी परेशानियां कम लग रही हैं या उसका उद्देश्य गरीब विद्यार्थियों को महंगी शिक्षा प्रदान करना है? सरकार को यह शुल्क वृद्धि वापस लेनी चाहिए।

’विनीत, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

गलतियों से सीख

हर साल पंद्रह अगस्त का दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है वहीं इसमें भारत के खंडित होने का दर्द भी छिपा होता है। वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास शायद ही किसी देश का रहा हो। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामरिक और आर्थिक हमले भी इतिहास में किसी देश पर नहीं हुए। शायद हमारा वैभव और हमारी समृद्धि की कीर्ति ही हमारे पतन का कारण भी बनी। भारत के ज्ञान और संपदा के चुंबकीय आकर्षण के चलते विदेशी आक्रांता लूट के इरादे से इस ओर आकर्षित हुए। वे आते गए और हमें लूटते गए। हर आक्रमण के साथ चेहरे बदलते गए लेकिन उनके इरादे वही रहे।

जो देश अपनी गलतियों से नहीं सीख पाता वह स्वयं इतिहास बन जाता है। हमें भी शायद अपनी इसी भूल की सजा मिली। कई मायनों में इस खंडित भारत को हम आज आजाद भारत कहते हैं। जिस दिन हम भारत को उसकी खोई हुई अखंडता लौटा देंगे वह दिन हमारी ओर से हमारे वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि का दिन होगा।

’सोनू कुमार सोनी, बेतिया, बिहार

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