चौपाल: आतंकवाद और हम

सांप्रदायिक सद्भाव आतंकवाद को कुचलने के लिए सर्वाधिक अचूक हथियार है। इसलिए देश में किसी को भी धर्म अथवा जाति आधारित विद्वेष फैलाने का कोई मौका नहीं मिलना चाहिए। अनेक बार सामाजिक उत्पीड़न भी आतंकवाद को पोषित करता है।

आतंकी हमेशा दूसरों को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है।

स्थायी शांति और प्रगति के लिए आतंकवाद को नष्ट करना जरूरी है। आतंकी पराए भी हो सकते हैं और अपने भी। वे सीमा पार के हो सकते हैं तो अपने गली-मोहल्ले के भी। सीमा पार के आतंकी सीधे राष्ट्र की संप्रभुता को चुनौती देते हैं तो सीमा के भीतर के आतंकी इसके साथ-साथ सामान्य नागरिकों को भी निशाना बनाते हैं। आतंकी हमेशा दूसरों को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है।

आतंकी कब, कहां किस रूप में अपने शिकार पर हमला करेगा, यह पहले से जान लेना कई बार मुमकिन नहीं हो पाता। विदेशी और स्वदेशी, दोनों तरह के आतंकवाद पर प्रभावी अंकुश तभी लगाया जा सकता है जब हम सब अपना फर्ज ईमानदारी से निभाएं। कुछ लोग कई बार अपनी जेब भरने के लिए शरीफ लोगों को परेशान करते हैं और आतंकवाद का सफाया करने के बजाय उसके लिए जमीन तैयार करते हैं। उच्च अधिकारियों को ऐसे सभी लोगों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

सांप्रदायिक सद्भाव आतंकवाद को कुचलने के लिए सर्वाधिक अचूक हथियार है। इसलिए देश में किसी को भी धर्म अथवा जाति आधारित विद्वेष फैलाने का कोई मौका नहीं मिलना चाहिए। अनेक बार सामाजिक उत्पीड़न भी आतंकवाद को पोषित करता है। गौतम-गांधी के भारत में हम सभी का दायित्व है कि हमेशा सामाजिक समरसता के लिए सक्रिय रहें। आतंकवाद को परास्त करने के लिए देश के प्रत्येक नागरिक को सजग रहना चाहिए क्योंकि हमारी एक छोटी-सी चूक भी राष्ट्र को बहुत अधिक हानि पहुंचा सकती है।

’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

स्वार्थों की सियासत
प्रधानमंत्री के विरोध में धीरे-धीरे एक के बाद एक विपक्षी दलों के नेता जिस प्रकार लक्षित हमले के मुद्दे पर लामबंद होकर सवाल खड़े कर रहे हैं, उससे केंद्र सरकार और भारतीय सेना द्वारा की गई आतंकवादियों और उनके आकाओं की सटीक व साहसिक मोर्चाबंदी का मखौल उड़ रहा है। विश्व के अनेक देशों ने आतंकी आकाओं और उनके अड्डों पर भारतीय कार्रवाई को न केवल सराहा है, बल्कि उसके लिए अपना समर्थन भी व्यक्त किया है। ऐसे में आतंकियों पर जोरदार प्रहार कर रही केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों व भारतीय सेना की बलिदानी कार्रवाई को अलग नजरिये से देख रहे विपक्षी नेताओं को अपनी गलतबयानियों से बचने की आवश्यकता है। आज पूरा देश आतंकवाद के खात्मे के लिए एकजुट खड़ा है। नेताओं को इस नाजुक वक्त में अपनी स्वार्थों की सियासत से बाज आना चाहिए।

’पारस एफ खेमसरा, सांवेर, इंदौर

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