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चौपाल: क्या अब

मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष ने तो हिंदू अथवा भगवा आतंक को लश्कर व जैश से ज्यादा बड़ा खतरा तक बता दिया था। क्या अब ये लोग अपने आरोपों और गलतबयानी के लिए माफी मांगेंगे? साधु-साध्वी को जेल में जो यातनाएं इन लोगों के कारण मिलीं उसकी भरपाई क्या किसी भी तरह से संभव है?

Author March 27, 2019 3:00 AM
समझौता एक्सप्रेस धमाके में असीमानंद के अलावा लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और कमल चौहान पर आरोप लगे थे। (एक्सप्रेस फोटोः जयपाल सिंह)

समझौता एक्सप्रेस धमाका केस में स्वामी असीमानंद और अन्य अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया। इसके पहले साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और कई अन्य आरोपी मालेगांव, हैदराबाद मक्का मस्जिद और अजमेर दरगाह धमाकों के मामलों में भी रिहा किए जा चुके हैं। इन घटनाओं को आधार बनाकर अनेक कांग्रेस नेताओं ने कथित हिंदू आतंकवाद का हव्वा खड़ा कर उस पर प्रहार किए थे। मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष ने तो हिंदू अथवा भगवा आतंक को लश्कर व जैश से ज्यादा बड़ा खतरा तक बता दिया था। क्या अब ये लोग अपने आरोपों और गलतबयानी के लिए माफी मांगेंगे? साधु-साध्वी को जेल में जो यातनाएं इन लोगों के कारण मिलीं उसकी भरपाई क्या किसी भी तरह से संभव है?
’अजय मित्तल, खंदक, मेरठ

प्रदूषण के वाहक
सड़कों पर प्रदूषण की लगातार विकट होती समस्या से निपटने के लिए वाहन प्रदूषण जांच केंद्र के जरिए छह माह तक की अवधि के लिए दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए निर्धारित शुल्क लेकर प्रमाणपत्र दिया जाता है। इस प्रमाणपत्र के पीछे उद्देश्य था कि इससे वाहन प्रदूषण पर एक हद तक लगाम लगेगी, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं है। सड़कों पर धुआं उगलते वाहन हर जगह दिख जाते हैं। ऐसे में प्रदूषण जांच औपचारिकता मात्र बन कर रह जाती है। होना यह चाहिए कि प्रदूषण जांच में खरा न उतरने वाले वाहन को एक-दो या तीन बार चेतावनी देकर इंजन सुधारने या बदलने जैसी कार्रवाई की जाए ताकि आम लोग प्रदूषण के शिकार होने से बचें और सैद्धांतिक व व्यावहारिक तौर पर वाहन प्रदूषण जांच केंद्र की प्रासंगिकता भी बनी रहे।
’मिथिलेश कुमार, भागलपुर, बिहार

जागरूकता जरूरी
किसी देश की पहचान उसकी संस्कृति, भू-भाग और उसके नागरिकों से होती है। आज हमारे पास अपनी विशेष संस्कृति है, भूभाग है, नागरिक हैं लेकिन जागरूक नागरिकों की कमी है। जागरूक नागरिक का अर्थ है, जो अपने अधिकारों के प्रयोग के साथ कर्तव्यों का भी पालन करें और आसपास हो रही गतिविधियों पर आलोचनात्मक नजर रख सकें। देश की आधी से अधिक जनसंख्या को अपने अधिकारों के बारे में नहीं मालूम और जिन्हें मालूम है उनमें से अधिकतर लोग उन अधिकारों का उपयोग नहीं करते हैं। समस्या यहां पर यह है कि बिना जागरूकता के न तो प्रशासन सजग रह पाता है और न सरकार। इसके चलते विकास योजनाएं आम जनता तक नहीं पहुंच पाती हैं और न नागरिकों की समस्याएं सरकार और प्रशासन तक।
सरकार और प्रशासन के बीच संपर्क स्थापित करने का दायित्व प्रशासन का है। लिहाजा, प्रशासन को लोगों से जुड़ कर जागरूकता लाने की आवश्यकता है जिसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका शिक्षा की होगी। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार कर प्रशासन आसानी से देश में जागरूक नागरिकों का निर्माण कर सकता है। ये जागरूक नागरिक अपने विवेक के जरिए कार्य को अंतिम परिणति तक पहुंचा कर राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।
’योगेश कुमार जांगिड़, बीएचयू, वाराणसी

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