चौपाल: सुरक्षा का आधार - Jansatta
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चौपाल: सुरक्षा का आधार

आधार डाटा की सुरक्षा से जुड़ा मामला अगर इतना ही सामान्य होता तो सुप्रीम कोर्ट में क्यों जाता? इसमें कोई शक नहीं है कि व्यक्तियों से जुड़ी सूचना/ डाटा/ जानकारी वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए भविष्य में एक बड़ा ‘तेल भंडारण’ रूपी खजाना है।

Author August 3, 2018 2:42 AM
टाई चेयरमैन आरएस शर्मा

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष ने ट्विटर अकाउंट से अपना आधार नंबर साझा किया और खुले तौर पर चुनौती दे डाली कि ‘कोई मेरे आंकड़े/ जानकारी लीक कर के दिखाए!’ इसके महज कुछ ही घंटों में उनकी चुनौती स्वीकार करते हुए फ्रांस के इलियट एल्डरसन (सुरक्षा विशेषज्ञ) ने आधार डाटा के पूरी तरह सुरक्षित होने की पोल खोल दी और उनका पता, निजी फोन नंबर, जन्मतिथि आदि महत्त्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक कर दी। साथ ही एल्डरसन ने आगे लिखा कि ‘आधार संख्या उजागर करना कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आपको लग गया होगा।’

यह प्रकरण हमें क्या सीख देता है? जिस देश में इतने अनपढ़ व्यक्ति रहते हों वहां आधार की सुरक्षा कितना अहम मुद्दा हो सकता है शायद इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। और यदि इसका पता होने के बावजूद सरकार व संबंधित विभाग लोगों के डाटा को सुरक्षित नहीं रख पाते हैं तो यह देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा व्यवस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। सरकार के कई मंत्री खुले तौर पर कह चुके हैं कि लोगों का डाटा सुरक्षित है, पर यह कितना सुरक्षित है यह उन्हें भी पता है। फेसबुक व कैम्ब्रिज एनालिटिका की धोखाधड़ी जगजाहिर है। आधार डाटा की सुरक्षा से जुड़ा मामला अगर इतना ही सामान्य होता तो सुप्रीम कोर्ट में क्यों जाता? इसमें कोई शक नहीं है कि व्यक्तियों से जुड़ी सूचना/ डाटा/ जानकारी वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए भविष्य में एक बड़ा ‘तेल भंडारण’ रूपी खजाना है। हम आधार नंबर का उदाहरण लेते हैं तो उसमें व्यक्ति की लगभग सारी निजी जानकारियां होती हैं जैसे, उसका पता, फोन नंबर, धार्मिक आस्था आदि।

आधार नंबर से लगभग सभी का बैंक खाता, स्वास्थ्य बीमा, आमदनी और न जाने क्या-क्या व्यक्तिगत जानकारी जुड़ी हुई है। जरा सोचिए, अगर ये जानकारियां बड़ी-बड़ी कंपनियों के पास चली जाएं तो वे अपने देश के साथ क्या-क्या कर सकती हैं! वे हमारी पसंद-नापसंद से वाकिफ हो जाती हैं इसके बाद न सिर्फ अपना व्यापार बढ़ाएंगी बल्कि देश के सामाजिक व राजनीतिक हालात को भी अपने मुताबिक बदलने की कोशिश कर सकती हैं। अपने हितानुकूल किसी राजनीतिक दल को देश में जिताने या हराने में शामिल हो सकती हैं जैसा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर अमेरिकी चुनाव में ट्रंप को जिताने और हिलेरी क्लिंटन को हराने के आरोप लगा था। डाटा सुरक्षा का मुद्दा तो बहुत बड़ा और संवेदनशील भी है। हम बस उम्मीद करते हैं कि सरकार आधार डाटा की सुरक्षा को इतने हल्के में न ले और नींद से उठ जाए।
’कन्हैया लाल ‘कृष्णन’, मुखर्जी नगर, दिल्ली

बढ़ते अपराध
कोई व्यक्ति अपने अच्छे नैतिक संस्कार के कारण गलत काम नहीं करता है तो कोई कानून के भय से जुर्म करने से परेहज करता है। लेकिन आज लगता है कि लोगों में न तो नैतिक बोध रह गया है और न ही उन्हें कानून का भय सताता है। हत्या, बलात्कार, चोरी-डकैती, ठगी, फरेब आदि अपराध दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब बलात्कार की घटनाएं समाचारपत्रों की सुर्खियां न बनती हों। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि मुजफ्फरपुर के बाल सुधार गृह में 34 बच्चियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म कई माह से होता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। इस कांड के दोषियों ने तो व्यवस्था को भी गुनहगार बना दिया।
’ मिथिलेश कुमार, बलुआचक, भागलपुर

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