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चौपाल : शराब के शिकार

कानपुर नगर और देहात में शराब से बारह लोगों की मौत का एक कारण मिलावट भी संभव है क्योंकि लोगों ने सरकारी ठेके से इसकी खरीद की थी। इससे पहले 2017 में आजमगढ़ में भी जहरीली शराब से चौदह लोगों की मौत हुई थी लेकिन जांच की लीपापोती कर पूरे मामले को भुला दिया गया। सरकार ने शराब से मौतें होने पर पूर्व में तय कानूनों को कड़ा भी किया है।

उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। आखिर क्या वजह है कि किसी न किसी जिले में हर साल जहरीली शराब लोगों की असमय मौत का कारण बनती है! सरकार की ओर से कड़े कदम उठाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की मिलीभगत से फिर अवैध शराब का धंधा फिर शुरू हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में फिर भट्ठियां धधकने लगती हैं और कच्ची शराब बिकने लगती है। कानपुर नगर और देहात में शराब से बारह लोगों की मौत का एक कारण मिलावट भी संभव है क्योंकि लोगों ने सरकारी ठेके से इसकी खरीद की थी। इससे पहले 2017 में आजमगढ़ में भी जहरीली शराब से चौदह लोगों की मौत हुई थी लेकिन जांच की लीपापोती कर पूरे मामले को भुला दिया गया। सरकार ने शराब से मौतें होने पर पूर्व में तय कानूनों को कड़ा भी किया है। जहरीली शराब से मौत पर अब दोषियों को मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। इसमें आजीवन कारावास के साथ ही दस लाख रुपए का भारी भरकम जुर्माना भी चुकाना होगा। सरकार ने 107 वर्ष पुराने आबकारी कानून में संशोधन कर उसे कड़ा तो बनाया है लेकिन लगता है कि इसके संदेश लोगों के बीच तक नहीं पहुंचे हैं। लिहाजा, अब जरूरी है कि ऐसे किसी मामले में कड़ा दंड देकर अवैध शराब के धंधे में लिप्त लोगों में भय पैदा किया जाए। इसके साथ ही अधिकारियों को भी कसने की जरूरत है।
’आदर्श दाक्षित, महोली, उत्तर प्रदेश

जानलेवा वायरस
आज दुनिया कई तरह की जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रही है। कुछ बीमारियों के फैलने का कारण पशु-पक्षी बताए जाते हैं। भारत भी इन बीमारियोंं की चपेट में आ जाता है। जानलेवा वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए जागरूकता और सतर्कता बहुत जरूरी है। भारत में कभी चूहों से कभी मुर्गों से और कभी अन्य जानवरों से जानलेवा वायरस फैलते रहे हैं और बहुत से लोगों की जान के दुश्मन बनते आए हैं। सरकारों, प्रशासन और आमजन की जागरूकता और सतर्कता से इन पर काबू पाया जा रहा है। अब केरल में मलेशिया से निपाह वायरस पहुंच गया। इस जानलेवा वायरस के फैलने का कारण सुअर और चमगादड़ को बताया जा रहा है। केरल में अब तक निपाह वायरस ने लगभग एक दर्जन लोगों की जान ले ली है। केंद्र और राज्य सरकारें इस वायरस को लेकर काफी सतर्क हो गई हैं, लेकिन आमजन को भी इससे बचाव के बाबत गंभीरता दिखानी होगी। सरकार को चाहिए कि आमजन को इसके प्रति जागरूक करने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाए और इससे बचने के तौर तरीके जन-जन तक पहुंचाए। मीडिया भी इसके लिए विशेष कार्यक्रम चलाए।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर