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चौपाल: अमेरिका में हिंदी

अमेरिका में हिंदी बोलने वाले डॉक्टर काफी बड़ी संख्या में हैं क्योंकि वे हिंदुस्तान में डिग्री लेने के बाद वहां जाते हैं। इतना जरूर है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोग आपस में हिंदी में ही बतियाते हैं।

Author November 2, 2018 3:00 AM
Hindi Diwas 2018: प्रतिकात्मक तस्वीर।

पिछले दिनों ‘अमेरिका में अंग्रेजी के बाद हिंदी बनी दूसरे नंबर की भाषा’ शीर्षक समाचार ने कुछ अखबारों में सुर्खियां बटोरीं। इस तरह के समाचार पढ़कर खुद को खुश करना कतई उचित नहीं होगा। अमेरिका में स्पैनिश बोलने वाले हिंदी से कहीं अधिक संख्या में हैं। अमेरिकी पुस्तकालयों में हिंदी की पुस्तकें ‘नहीं’ के बराबर नजर आती हैं। वहां आपको यूरोपीय भाषाओं के अलावा चीनी और जापानी भाषा की पुस्तकें भी नजर आएंगी।

अमेरिका में हिंदी बोलने वाले डॉक्टर काफी बड़ी संख्या में हैं क्योंकि वे हिंदुस्तान में डिग्री लेने के बाद वहां जाते हैं। इतना जरूर है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोग आपस में हिंदी में ही बतियाते हैं। शायद यह उन्हें ‘मातृभूमि से दूर रहने पर पैदा होने वाली खिन्नता’ से उबरने में मदद करती है जिससे अधिकतर प्रवासी वर्षों तक पीड़ित रहते हैं। एक बात और। अमेरिका में रहते हुए भी कुछ भारतीय हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर सक्रिय नजर आते हैं। इसमें पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागेदारी अधिक है। ऐसे सभी हिंदी प्रेमियों की बदौलत वहां हिंदी का भविष्य अच्छा प्रतीत होता है।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

नापाक इरादे 

पाकिस्तान नापाक करतूतों से अपनी खोटी नीयत का प्रमाण हमेशा देता आया है। प्रधानमंत्री बनते ही इमरान खान ने दोस्ती का इशारा करते हुए भारत के एक कदम बढ़ाने पर पाकिस्तान द्वारा दो कदम बढ़ाने की बात कही थी लेकिन उसके ठीक बाद ही सीमा पर भारतीय जवान की बर्बर हत्या ने उसके इरादे को बेनकाब कर दिया था। उसके बाद अब मुंबई हमले के सरगना हाफिज सईद के संगठन पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश की मियाद को न बढ़ा कर अपनी जहरीली मंशा का इजहार कर दिया है। ऐसे में भारत से नरम या सकारात्मक रुख की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। पाकिस्तान को मालूम होना चाहिए कि उसकी गोद में पलता आतंक अपने समांतर दोस्ती और प्रेम जैसी सद्भावनाओं को पनपने नहीं देगा।
’प्राची प्रियम, रामगढ़

बर्बादी के पटाखे
दिवाली खुशियों का पर्व है लेकिन पटाखों के कानफोडू शोर और वायु प्रदूषण से त्योहार की खुशी बर्बाद हो जाती है। तेज आवाज वाले पटाखों का सबसे ज्यादा असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दिल और सांस के मरीजों पर पड़ता है। इनसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं जो हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली में पटाखों के कारण दिवाली के बाद वायु प्रदूषण छह से दस गुना और ध्वनि प्रदूषण 15 गुना तक बढ़ जाता है जिसका हमारे शरीर पर घातक असर होता है। इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली और दूसरे त्योहारों के अवसर पर पटाखे फोड़ने का समय निर्धारित कर दिया है ताकि प्रदूषण ज्यादा न फैले और साथ ही ऑनलाइन पटाखे बेचने पर भी पाबंदी लगा दी है। दरअसल, पटाखों के दुष्परिणामों के प्रति लोगोंं का खुद जागरूक होना जरूरी है।
’अभिजीत मेहरा, गॉड्डा, झारखंड

 

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