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चौपाल: मॉडल के मायने

मैंने एक पल रुक कर पूछा कि गांधीवादी से अभिप्राय क्या है? कुछ खुद को गांधीवादी कहते हैं, कुछ खद्दर पहनते हैं, कुछ गांधी का नाम जपते हैं।

Author Published on: October 27, 2016 5:53 AM
महात्मा गांधी। (फाइल फोटो)

अक्सर मैं सोचता हूं कि अगर किसी को देख कर और प्रत्यक्ष अनुभव करके परिभाषित करते तब क्या होता! बहुत साल पहले गांधीवादी संस्थाओं पर रिसर्च के लिए हॉलैंड से आई एक युवती ने मुझसे पूछा था कि कौन-सी संस्थाएं गांधीवादी हैं। मैंने एक पल रुक कर पूछा कि गांधीवादी से अभिप्राय क्या है? कुछ खुद को गांधीवादी कहते हैं, कुछ खद्दर पहनते हैं, कुछ गांधी का नाम जपते हैं। लेकिन कुछ अन्य ऐसा कुछ नहीं करते। आज भी मुझे समझ नहीं आता कि सच्चे गांधीवादी कौन हैं और कहां हैं। खादी का चोला पहनने से गांधीवादी कैसे हो सकते हैं? ऐसे ही गेरुआ चोला धारण करने वालों में बहुत कम सच्चे साधु होते हैं। अधिकतर तो उसकी आड़ में भौतिक और अनैतिक मायाजाल में सांसारिक लोगों से भी ज्यादा लिप्त दिखते हैं।

बचपन में मैंने जिस सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, उसका नाम मॉडल स्कूल था। उसकी इमारत जीर्ण-शीर्ण थी। बैठने के लिए फटी दरी-चटाई भी कम, शौचालय जैसी सुविधा का नामोनिशान नहीं, अध्यापक डंडे से मारते और अभद्र भाषा के इस्तेमाल करते। बड़े होकर सोचा करता कि ये किस तरह का मॉडल हुआ! बहुत से ऐसे अनुभव हैं। इसी तरह, एक शब्द को मॉडल के रूप में पेश किया जाता है- समाजवाद। लेकिन फिलहाल समाजवादी पार्टी के संदर्भ में देखें तो यह मॉडल कहां ठहरता है, यह सभी समझ सकते हैं। अकेले समाजवादी पार्टी ही नहीं, भारत में लोकतंत्र है और जो भी राजनीतिक दल हैं, वे सभी लोकतांत्रिक कहे जाते हैं। लेकिन उनके भीतर वास्तव में राजतंत्र काम करता है और जो समाजवादी होने का दावा करते हैं, उनका आचरण सामंतवादी है।
’कमल जोशी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

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