ताज़ा खबर
 

अन्न की बर्बादी

वेदों और अन्य धर्मग्रंथों में कहा गया है- खाओ मन भर, छोड़ो ना कण भर।

Author April 17, 2017 1:33 AM
सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण रिर्पोट के अनुसार, ‘गरीबी ने आज भी देश के तीस फीसद आबादी को अपने चंगुल में जकड़ रखा है। (रॉयटर्स फोटो)

वेदों और अन्य धर्मग्रंथों में कहा गया है- खाओ मन भर, छोड़ो ना कण भर। लेकिन आजकल यह प्रचलन चल पड़ा है- खाओ कण भर और फेंको टन भर! देश में हो रही खाने की बर्बादी को लेकर हाल ही में केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने होटलों-रेस्तरांओं में परोसी जाने वाली खाद्य सामग्रियों की मात्रा निर्धारित करने की बात कही है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए देशवासियों से निवेदन किया था। लेकिन हकीकत यह है कि जितना तैयार शुद्ध भोजन बर्बाद नहीं होता उससे कई गुना अधिक अन्न सरकारी गोदामों में सड़ने, चूहों के हजम करने व सुस्त परिवहन प्रणाली में तबाह हो जाता है। देश में तकरीबन 1.3 अरब टन अनाज बर्बाद कर दिया जाता है जबकि करोड़ों लोग भूखे पेट सोने के लिए विवश हैं।

खाद्य अपव्यय से होने वाली क्षति बहुदेशीय है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 750 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होता है जो कि स्विट्जरलैंड के सकल घरेलू उत्पाद के बराबर है। भोजन के अपव्यय के मामले में हमारा देश अव्वल नंबर पर है। विश्व खाद्य संगठन के प्रतिवेदन के अनुसार देश में हर साल पचास हजार करोड़ रुपए का भोजन बर्बाद चला जाता है, जो कि देश के उत्पादन का चालीस फीसद है। इस अपव्यय का दुष्प्रभाव हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। हमारा देश पानी की कमी से जूझ रहा है लेकिन अपव्यय किए जाने वाले इस भोजन को पैदा करने में 230 क्यूसिक किमी पानी व्यर्थ चला जाता है जिससे दस करोड़ लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है। एक आकलन के मुताबिक अपव्यय से बर्बाद होने वाली धनराशि से पांच करोड़ बच्चों की जिदगी संवारी जा सकती है, उनका कुपोषण दूर कर उनके लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है। चालीस लाख लोगों को गरीबी के चंगुल से मुक्त किया जा सकता है और पांच करोड़ लोगों को आहार सुरक्षा की गारंटी तय की जा सकती है। अन्न भंडार के समुचित प्रबंधन के अभाव में बारिश के समय बड़ी मात्रा में अनाज बह कर चला जाता है और पानी के संपर्क में आने के कारण अपनी गुणवत्ता खो देता है। खेतों से आने वाले अन्न के रख-रखाव को लेकर भी मंत्रालय ध्यानाकर्षण कर गंभीरता बरतता तो शायद लाखों लोगों के भूखे पेट सोने की नौबत नहीं आती।
’देवेंद्रराज सुथार, जोधपुर

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जारी हुआ जमानती वारंट; पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर की थी टिप्पणी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App