भारत का हासिल

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) ने अपने गठन के पचास साल बाद पहली बार भारत की विदेश मंत्री को अतिथि के रूप में न्योता दिया। यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। अबु धाबी में हुए ओआइसी के विदेश मंत्री स्तर के सम्मेलन में भारतकी विदेश मंत्री ने अपनी बात रखी।

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) के 46वें समारोह में पहली बार भारत की विदेश मंत्री को अतिथि के रूप में न्योता दिया गया। (Source: PTI)

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) ने अपने गठन के पचास साल बाद पहली बार भारत की विदेश मंत्री को अतिथि के रूप में न्योता दिया। यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। अबु धाबी में हुए ओआइसी के विदेश मंत्री स्तर के सम्मेलन में भारतकी विदेश मंत्री ने अपनी बात रखी। इससे पहले 1969 में जब मोरक्को में इस संगठन की पहली बैठक हुई थी तो भारत को भी बुलाया गया था। लेकिन तब भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तानी सैन्य शासक जनरल याह्या खान के विरोध के चलते लौटा दिया गया था। आज उसी भूमिका में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दिखाई दे रहे हैं। ओआइसी में भारत को भी बुलाने की खबर से वे इतने बौखला गए कि उन्होंने बैठक का बहिष्कार ही कर दिया। इंडोनेशिया एवं पाकिस्तान के बाद भारत में ही सबसे अधिक मुसलमान रहते हैं। इसलिए हमें तो महज अतिथि नहीं, बल्कि स्थायी सदस्य के तौर पर वहां होना चाहिए ताकि पाकिस्तान द्वारा लगातार हमारे ऊपर जो मनगढ़ंत आरोप लगाए जाते हैं, उनका हम मुहतोड़ जवाब दे सकें। इस संगठन में सत्तावन देश हैं यानी दुनिया के एक चौथाई से भी अधिक देश। इस नाते इनके ऊपर इस्लामिक चरमपंथियों के खात्मे की दिशा में भी ठोस कदम उठाने का भी दायित्व आता है।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

पाक को सबक
भारत ने जिस तरह से पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है, वह अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण कूटनीति का हिस्सा है। यह भारत की सख्ती का ही नतीजा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार भारत से शांति की अपील कर रहे हैं। पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा भारतीय सीमा का उल्लंघन करने पर भारतीय हवाई सेना ने उसे तुरंत जवाब दिया। जवाबी कार्रवाई में सेना ने उनके एक विमान को मार कर नीचे गिरा दिया। पाकिस्तानी वायु सेना का उद्देश्य भारतीय सेना को नुकसान पहुंचाने का था। भारतीय सीमा में दाखिल होने से पहले भारतीय वायुसेना ने उसे खदेड़ दिया। वास्तव में यह सेना की तत्परता ही थी जो बड़े नुकसान होते-होते बच गया। हालांकि इस कार्रवाई में हमारा भी एक विमान मिग-21 नष्ट गया। भारत सरकार ने अपने बहादुर पायलट को बचाने के लिए पाकिस्तान के साथ जो सख्ती और कूटनीति अपनाई, उसी से विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी संभव हुई। पाकिस्तान का सदाबहार मित्र चीन भी अब उसका साथ छोड़ चुका है। चीन ने उसे कड़ी चेतावनी दी है। आतंकवाद के मुद्दे पर विभिन्न देशों जैसे अमेरिका, फ्रांस और आॅस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान की निंदा की है। भारत द्वारा की गई कार्रवाई में विश्व के सभी मुल्कों ने भारत का समर्थन भी किया है। वास्तव में आतंकवाद पूरी मानव जाति के लिए खतरा है। इसे पूर्ण रूप से खत्म करने में ही भलाई है।
’दुर्गेश शर्मा, गोरखपुर

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