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मीडिया की जिम्मेदारी

लोकतंत्र का एक स्तंभ मीडिया भी है। लेकिन इसकी गैर जिम्मेदाराना भूमिका चिंता का विषय बन गई है। आतंकवाद को लेकर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है और देश युद्ध के मुहाने पर खड़ा है।

media funny reportingभारत पाकिस्तान तनाव पर दोनों ही देशों में हो रही अजीब रिपोर्टिंग। (image source-twitter/video grab image)

लोकतंत्र का एक स्तंभ मीडिया भी है। लेकिन इसकी गैर जिम्मेदाराना भूमिका चिंता का विषय बन गई है। आतंकवाद को लेकर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है और देश युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी बनती है कि वह संयम बरते और तथ्यपरक रिपोर्टिंग करे। यह हकीकत है कि देश में और सीमाओं पर जिस तरह से हमारे जवान शहीद हो रहे हैं उससे नागरिकों में गुस्सा और सहानुभूति उमड़ना लाजिमी है। ऐसे में मीडिया को जिम्मेदारी समझनी चाहिए। न्यूज रूम में बैठे एंकर इतने उत्तेजित और क्रोधित दिखते हैं कि वह ये भी भूल जाते हैं कि उनको क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। खबर ब्रेक की होड़ में वे यह भी भूल जाते हैं कि कौन सी खबर राष्ट्र हित में है या नहीं। इसी का एक उदाहरण देखने को मिला कि हमारे एक जाबांज विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर मीडिया ने टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में उनकी पूरी जन्मकुंडली बता डालने से परहेज नहीं किया। अभिनंदन को लेकर मीडिया ने सारी सूचनाएं सार्वजनिक कर दीं। ऐसे में पाकिस्तान सौदे बाजी भी कर सकता था। नासमझी तो तब और भी बढ़ गई जब इमरान खान ने हमारे कमांडर को रिहा करने की बात की। तभी से मीडिया ने इमरान और उनकी सरकार को डरपोक कहना शुरू कर दी। मीडिया में बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा और पत्रकारिता की गरिमा को बचाना होगा।
’मोहम्मद आसिफ, दिल्ली

मानवीय पहल की मिसाल
जान जोखिम में डाल कर सीवरों में उतर कर सफाई करने वाले सफाई कर्मचारियों को दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बड़ी राहत दी है। दिल्ली सरकार ने विदेशों से ऐसी पचास मशीनों को खरीदा है। सरकार का यह अतिप्रसंशनीय काम और बड़ा कदम है। अब सफाई कर्मचारियों को सीवरों में नहीं उतरना पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी सीवरों में दम घुटने से मारे गए। इस मानवीय और जरूरी कदम के लिए दिल्ली सरकार की जितनी प्रशंसा की जाए,कम है। इस काम से सभी सरकारों के कर्णधारों को प्रेरणा लेनी चाहिए जो अपनी सुखसुविधा और विलासिता के हर संसाधन को चुटकियों में हासिल करने को उद्यत रहते हैं, लेकिन सीवर सफाई के दौरान विषाक्त गैसों से दम घुटने से मरने वाले उन गरीबों के अनाथ बीबी बच्चों के लिए एकदम असहिष्णु बने रहते हैं! दिल्ली सरकार के इस अनुकरणीय पहल का देश के हर शहरों के नगर निगमों को अपने शहर में भी अनुसरण कर ऐसी मशीनों से ही सीवरों की सफाई कराने के प्रयास करने चाहिए, ताकि इन गरीब और कथित अंत्यज लोगों का व उनके परिवार का जीवन सुरक्षित रहे।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

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