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अब सिंधुदेश

यह वही सिंध है जहां की असेंबली ने 1943 में पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पास किया था। ऐसा करने वाली वह पहली अधिकारी संस्था थी।
Author नई दिल्ली | September 8, 2016 02:05 am
गिलगित और बलूचिस्‍तान के बाद अब पाकिस्‍तान के सिंध प्रदेश में भी आजादी के नारे लगे हैं।

पाकिस्तान में सिंधियों ने सिंधुदेश की मांग फिर से उठा दी है। इतिहास की विडंबना देखिए कि यह वही सिंध है जहां की असेंबली ने 1943 में पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पास किया था। ऐसा करने वाली वह पहली अधिकारी संस्था थी। और दूसरी विडंबना यह कि जिस व्यक्ति ने वह प्रस्ताव पेश किया और पारित कराया था, वे जीएम सैयद पच्चीस वर्ष में ही पाकिस्तान के विरोधी हो गए। उन्होंने ही 1972 में ‘जीये सिंध’ पार्टी बनाकर सिंधुदेश की मांग सबसे पहले उठाई। सैयद ने इस बात के लिए माफी भी मांगी थी कि उन्होंने पाकिस्तान का प्रस्ताव असेंबली में पारित करवाया। उनके शब्द थे- ‘पाकिस्तानियत ने इंसानियत और सिंधियत की हत्या कर दी है।’

आज सिंधुदेश के साथ ही आजाद बलूचिस्तान, आजाद पख्तूनिस्तान, आजाद सरायकिस्तान (मुल्तान के आसपास का क्षेत्र सरायकी कहलाता है), आजाद गिलगित-बाल्तिस्तान आदि की मांग जोर पकड़ रही हैं और पाकिस्तानी सेना और तमाम सुरक्षा बल पूरी ताकत से इन मांगों को कुचल रहे हैं। योगीराज अरविंद ने ठीक ही कहा था कि पाकिस्तान एक कृत्रिम देश है, जिसके विखंडन में अधिक दिन नहीं लगेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान से अलग होने वाले भाग पहले भारत के मित्र और फिर भारत के हिस्से बनेंगे। उनके इस कथन के सत्य होने की प्रतीक्षा है।
’अजय मित्तल, मेरठ

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