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असली मालिक

महंगाई किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, सबको बराबर झेलनी पड़ती है।

Author नई दिल्ली | November 7, 2016 5:16 AM
इसमें दिखाने की कोशिश की गई कि महंगाई मीडिया द्वारा बढ़ाई गई है। (फोटो- टि्वटर)

देश और प्रदेशों में चुनावों से पहले पार्टियां अपनी मांगों के लिए धरना, प्रदर्शन, सड़क जाम, अनशन आदि के जरिए सरकार पर दवाब बढ़ाती हैं। सरकार भी चुनाव जीतने के लिए अनेक घोषणाएं करके मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए कहती है। लेकिन ऐसा करते हुए सरकार में सभी मतदाताओं के लिए बराबरी का भाव होना चाहिए। महंगाई किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, सबको बराबर झेलनी पड़ती है। ऐसे में सरकार को केवल अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता-बोनस आदि बढ़ा कर अपने दायित्व की पूर्ति नहीं कर लेनी चाहिए। उसे हर मतदाता को महंगाई भत्ते के नाम पर प्रतिमाह कुछ धनराशि देने पर विचार करना चाहिए।

सरकार सबको नौकरी नहीं दे सकती, रोटी के लिए प्रतिमाह पैसा दे सकती है। देश के सभी मतदाताओं को स्वाभिमान के साथ यह धनराशि ग्रहण करनी चाहिए। किसी परिवार के चार भाइयों के बीच भैंस तो नहीं बांटी जा सकती, लेकिन उसका दूध बांटा जा सकता है। इसी प्रकार प्रत्येक मतदाता को जमीन या सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती लेकिन कुछ भत्ता दिया जा सकता है। समय रहते ऐसा न करने का मतलब है अपने वोट से सरकार बनाने वाले वोटर को सरकारी सुविधा से वंचित रखना। जन-प्रतिनिधि और जन-सेवक सरकारी सुविधाओं का लाभ आम जनता की सेवा के नाम पर ही पाते हैं। लोकतंत्र में देश का असली मालिक मतदाता है, लिहाजा हर मतदाता को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित होना चाहिए।
’पीके सिंह पाल, रायबरेली रोड, लखनऊ

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