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पर्यावरण दिवस एक-दो दिन तक सीमित क्यों

हर साल पांच जून को ‘पर्यावरण दिवस’ पर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है।

Author June 13, 2017 5:53 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

साफ नोट
इन दिनों देखा जा रहा है कि 500 और 2000 रुपए के नोटों पर कुछ भी लिखा होने पर वे बाजार में नहीं चलते, जिससे लोगों को बहुत परेशानी होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस सिलसिले में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर चुका है कि जिन नोटों पर कुछ लिख दिया गया है, वे भी वैध हैं। फिर भी लोगों को चाहिए कि वे नोटों पर कुछ न लिखें। भले ही आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दे दिए हैं कि वे लिखे या गंदे नोट लेने से इनकार नहीं कर सकते, लेकिन सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से बाजार में ऐसे नोटों के चलन में दिक्कतें आ रही हैं। इसके मद््देनजर आरबीआई को चाहिए कि एक आम सूचना हर अखबार और टीवी चैनल पर प्रकाशित-प्रसारित कर असमंजस की स्थिति को खत्म करे ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।
’जफर अहमद, रामपुर डेहरू, मधेपुरा, बिहार
हमारा पर्यावरण
हर साल पांच जून को ‘पर्यावरण दिवस’ पर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है। मगर ये सब क्रियाकलाप एक-दो दिन तक क्यों सीमित रह जाते हैं? फिर पूरे वर्ष पर्यावरण को बचाने के लिए क्रियाकलाप तो दूर, इस विषय पर कोई चर्चा तक करना जरूरी नहीं समझता। पांच जून के बाद पर्यावरण का कार्य सिर्फ कागजों में सिमट जाता है। आखिर कब तक हम शासन-प्रशासन पर ही पर्यावरण बचाने का जिम्मा सौंपते रहेंगे? क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती कि पर्यावरण की सुरक्षा का बीड़ा उठाएं? हम कॉलेजों में पर्यावरण विषय पढ़ते हैं जो शायद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसलिए अनिवार्य किया गया कि आज की पीढ़ी पर्यावरण का महत्त्व समझे और उसकी सुरक्षा में योगदान दे। मगर हकीकत कुछ और ही है।
विद्यार्थी पर्यावरण के विषय में सिर्फ पास होने का लक्ष्य रखते हैं, और परीक्षा में पास होते ही पर्यावरण विषय के बोझ की गठरी को उतार फेंकते हैं। आज जरूरत है घरों से निकल कर लोगों को जागरूक करने की न कि शासन-प्रशासन के भरोसे बैठ कर पर्यावरण शुद्ध होने का इंतजार करने की। हमें ही घर-घर जाकर लोगों को बताना होगा कि किस प्रकार पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं। युवाओं द्वारा पर्यावरण के हित में उठाया गया हर कदम एक दिन बदलाव जरूर लाएगा।
’राजेश्वर सिंह, एएमयू, अलीगढ़

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