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चौपाल : कांग्रेस का हाल

अंग्रेजों के राज में कांग्रेस और देशवासियों का एकमात्र लक्ष्य था देश की आजादी। स्वतंत्रता दिलाने में कांग्रेस की प्रमुख भूमिका थी।
Author नई दिल्ली | June 13, 2016 01:21 am
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी।

संपादकीय ‘कांग्रेस के कर्णधार’ (7 जून) ने कांग्रेस की दुर्गति और उसके नेतृत्व की अक्षमता की ओर ध्यान आकर्षित किया है। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। हर राजनीतिक दल के अपने लक्ष्य और सिद्धांत होते हैं। अंग्रेजों के राज में कांग्रेस और देशवासियों का एकमात्र लक्ष्य था देश की आजादी। स्वतंत्रता दिलाने में कांग्रेस की प्रमुख भूमिका थी। स्वतंत्रता संग्राम के समय सारा देश कांग्रेस के साथ था। लेकिन अजादी मिलने के बाद अलग-अलग सिद्धांतों पर आधारित दल बन गए और हमारी राजनीतिक व्यवस्था में बहुत-सी बुराइयां प्रवेश करती गर्इं।

कांग्रेस आज देश सेवा के बजाय बोफर्स, 2 जी, कोयला आबंटन, अगस्ता आदि महाघोटालों के लिए जानी जाती है। उसकी साख रसातल में है। आज कांग्रेस के जो लोग यह दावा करते हैं कि उनकी पार्टी ने देश को आजादी दिलाई, उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि कांग्रेस के साथ उस समय सारा देश था। लेकिन आज की कांग्रेस गांधी-नेहरू की कांग्रेस से बिलकुल भिन्न है। वह महाघोटालों में डूबी हुई है। आज उसके पास कोई विचारधारा नहीं है। उसकी हार के कारणों पर विचार करें तो उनमें पहला है अहंकारी स्वभाव।

नेहरू से लेकर इंदिराजी और राजीव गांधी तक इस परिवार का व्यवहार सामंतवादी रहा है। कांग्रेस में ऐसे किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति को टिकने नहीं दिया जाता, जो आगे चल कर कभी परिवार को चुनौती दे सके । आजादी के आसपास के समय और उसके थोड़ा बाद तक उस समय की पीढ़ी की वफादारी इस परिवार के साथ रही है। वह परिवार के हर प्रकार के घमंड, नाज-नखरे बर्दाश्त करती रही है। लेकिन वर्तमान पीढ़ी सामंतवाद में विश्वास नहीं करती और हर चीज को गुण-दोष के आधार पर परखना चाहती है। सामंतवाद कांग्रेस की नस-नस में रच-बस गया है। लेकिन वर्तमान पीढ़ी इसके लिए तैयार नहीं है।

एस शंकर सिंह, द्वारका, नई दिल्ली

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