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जड़ों पर प्रहारे

नोटों से अधिक कालाधन सोने-चांदी जैसी धातुओं और जमीन-जायदाद में निवेश किया गया है।

Author January 3, 2017 12:48 AM
चुनाव आयोग के दफ्तर की तस्वीर।

पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद करने का तत्काल प्रभाव उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब जैसे राज्यों के चुनाव पर अवश्य पड़ेगा, जहां संभवत: चुनाव-पूर्व दलों और संभावित उम्मीदवारों ने बड़ी मात्रा में रकम जुटाई होगी। लेकिन तकनीक के इस युग में नकली नोट फिर से बनने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है, इसलिए अधिक चौकसी बरतनी होगी। सीमापार से आने वाले नकली नोटों के लिए खास सतर्कता बरतनी होगी।

गौरतलब यह भी है कि नोटों से अधिक कालाधन सोने-चांदी जैसी धातुओं और जमीन-जायदाद में निवेश किया गया है। इसे भी बाहर लाने की योजना बनानी होगी। जिस दिन 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की गई, उसी दिन देर रात तक ज्वेलर्स के पिछले दरवाजों से दुकानें खुलवा कर बड़ी मात्रा में सोने-चांदी की खरीद के समाचार आए थे। उसी दौरान एक अधिकारी के पुलिस बुलाने की धमकी देने पर सेल्सगर्ल का जवाब ‘बुला लीजिए पुलिस, अंदर आपके अधिकारियों के ही परिजन हैं, हम तो उन्हीं की मदद कर रहे हैं’ भी प्रकाशित हुआ था।

दिनों-दिन महंगे होते चुनाव और चुनाव में इस्तेमाल किए जाने वाले कालेधन से सभी परिचित हैं। चुनाव और कालेधन के गठबंधन को तोड़े बगैर किए जाने वाले विमुद्रीकरण जैसे उपाय सिर्फ पत्तियों का इलाज करेंगे, जड़ों का नहीं। कालेधन की जड़ों को नष्ट करने के लिए चुनाव सुधार, पुलिस सुधार, न्यायिक सुधार के साथ नैतिक दृष्टिकोण के विकास के लिए प्रभावी नियमन, नियंत्रण और कार्यान्वयन प्रणाली विकसित करनी होगी।
’सुरेश उपाध्याय, गीता नगर, इंदौर

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