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सीख पर सवाल

इनसे सबंधित घटनाएं मसलन अपहरण (जेएनयू), हत्या (रेयान स्कूल), छेड़छाड़ व अत्याचार (बीएचयू) आदि सामने आ रही हैं। क्या यह अफसोस की बात नहीं है?

Author Published on: September 28, 2017 6:21 AM
बीएचयू के मुख्य द्वार पर छात्रों की भीड़। (फाइल फोटो)

सीख पर सवाल
बचपन से हमें सिखाया जाता है कि अपने हक के लिए लड़ो, अत्याचार को मत सहो। यह सीख हमें दी किसने? जवाब है घर, स्कूल, कॉलेज आदि-आदि। लेकिन आज लगता है कि ये पवित्र स्थान खुद ही अपने इन प्रवचनों को भूलते जा रहे हैं। तभी तो इनसे सबंधित घटनाएं मसलन अपहरण (जेएनयू), हत्या (रेयान स्कूल), छेड़छाड़ व अत्याचार (बीएचयू) आदि सामने आ रही हैं। क्या यह अफसोस की बात नहीं है?
आज महिलाओं की आजादी पर कई सवाल उठे हैं। स्त्री आजाद है या आजाद होनी चाहिए? पर किससे? पुरुष से, समाज से, समाज की सोच से या खुद की सोच से? तो फिर क्यों महिला से रात को बाहर जाने पर सवाल किए जाते हैं? सोचने वाली बात है कि क्या वाकई हम आजाद हैं? अब तो लगता है, स्त्री का सुंदर होना भी एक गुनाह है क्योंकि कल सवाल होगा- तुम इतनी सुंदर क्यों हो? तुम इतनी सुंदर न होतीं, तो शायद यह छेड़छाड़ नहीं होती! वाह, ऐसा है हमारा समाज और उसकी सोच! यह वह समाज है जहां स्त्री के कपड़े, काम आदि पर सवाल किए जाते हैं। वैसे, जहां सोच ही नीच हो वहां यह कोई नई बात भी नहीं है।
जिसने (स्कूल-कॉलेज) आवाज उठाना सिखाया, उसी ने आवाज को दबाना चाहा। ‘हुई नाकाम यह हरकत तो यारो/ लाठीचार्ज करके सलाखों के पीछे पहुंचाया’ ।
’शादमा मुस्कान, नई दिल्ली

आतंक की जमीन
खुद को कभी ‘दामन ए रहमत’ की सरजमीं कहने वाला पाकिस्तान आज ‘टेररिस्तान’ बन गया है। वह भूल गया कि आतंक के जिन बीजों को अपनी सरजमीं में बो रहा है उसके दरख्त की शाखों से केवल उरी और पठानकोट नहीं निकलते, पेशावर स्कूल हमला भी जन्म लेता है।
कहा जाता है कि अपराध एक ऐसा भेड़िया है जो अपने बाप को भी खा जाता है। आतंकवाद अपराध का घिनौना रूप है और पाकिस्तान इस रूप को कभी क्वेटा तो कभी पेशावर में स्कूली बच्चों के शरीर से बहते हुए खून में देखता रहा है।
पाकिस्तान को समझना चाहिए कि आतंक की जिस पौध से वह दुनिया का सरगना बनना चाहता था उसी ने उसे दुनिया में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा है। पाकिस्तान को भारत से सीखना चाहिए। अनेक समस्याओं से जूझ रहा है लिहाजा दोनों मुल्कों को आपस में न लड़ कर इन समस्याओं से लड़ना चाहिए।
’शिव चौधरी, नोएडा

 

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