ताज़ा खबर
 

बेलगाम महंगाई

जिस किसी भी परिवार के सदस्य को कोरोना ने अपने क्रूर पंजों में दबोचा, उस परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ी और कई लोग आर्थिक मामले में फकीर वाली स्थिति में आ गए।

कोरोना महामारी ने सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर चोट पहुंचाई और सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया।

कोरोना की दूसरी लहर ने आम जनता को बेहाल कर डाला है। जिस किसी भी परिवार के सदस्य को कोरोना ने अपने क्रूर पंजों में दबोचा, उस परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ी और कई लोग आर्थिक मामले में फकीर वाली स्थिति में आ गए। वहीं दूसरी तरफ पिछले आठ-दस वर्षों में जो महंगाई नहीं रही, वह अब इस कोरोना काल में सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रही है। चाहे जो हो, सरकार न केवल महंगाई कम करने के लिए कदम उठाए, बल्कि महंगाई पर नियंत्रण भी रखे। मध्यमवर्गीय परिवारों की हालत बिगड़ती जा रही है। गरीब गुरबे को तो सरकार मुफ्त में खाने-पीने के गेहूं, दाल, चावल दे रही है। लेकिन मध्यम वर्ग के लिए सरकार की तरफ से मदद के हाथ खाली हैं। लोगों पास रोजगार नहीं होना इस समस्या में आग में घी का काम कर रहा है।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद (उज्जैन)

भ्रष्टाचार की मिसाल
देश में समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न प्रकार की विकास परियोजनाएं इसलिए चलाती हैं ताकि आम जनता को परेशानियों से बचाया जा सके। सड़कें, पुल, नाले, बांध इसी मकसद से बनाए जाते हैं। लेकिन दुख तब होता है जब निर्माण होने के साथ-साथ उसका उद्घाटन होने से पहले ही ये सब ढहते नजर आने लगें। हाल में यास तूफान के असर से बिहार में आठ करोड़ की लागत से बना पुल उदघाटन से पहले ही ढह गया। यह घटना बता रही है कि पुल की गुणवत्ता का स्तर क्या रहा होगा और इसे बनाने में किस स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ होगा। गनीमत तो यह है कि इसे अभी आम जनता के लिए खोला नहीं गया था। अगर इस पर आवाजाही शुरू हो जाती तो किसी की जान भी सकती थी। सरकार को इसकी उच्चस्तरीय जांच करवानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
’विजय कुमार धनिया, दिल्ली

Next Stories
1 चुनाव सुधार का वक्त
2 अंधविश्वास का रोग
3 प्रकृति का उपहार
ये पढ़ा क्या?
X